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बड़े खिलाड़ियों की भरोसे वाली कंपनियां जो देंगी शानदार रिटर्न

जब कोई बड़ा बिजनेस टाइकून नई शुरुआत करता है या फिर कोई बड़ा फैसला लेता है, तब लोगों का भरोसा उस पर कायम रहता है।
अपडेटेड Oct 08, 2019 पर 12:59  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कंपनी की सफलता सिर्फ उसके बिजनेस मॉडल पर ही निर्भर नहीं करती है। उसकी बागडोर किसके हाथों में है, ये बात भी बहुत मायने रखती है। जितनी बुलंद शख्सियत, उतनी ज्यादा तरक्की जैसे फलसफे पर अक्सर निवेशक यकीन करते हैं। यही वजह है कि जब कोई बड़ा बिजनेस टाइकून नई शुरुआत करता है या फिर कोई बड़ा फैसला लेता है, तब लोगों का भरोसा उस पर कायम रहता है। दिग्गज चेहरों के साथ लोग कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं। आज इस खास पेशकश में हम ऐसे ही कामयाब चेहरों की बात करेंगे और जानेंगे उनमें अब कितना दमखम है।


पहले कामयाब दिग्गज हैं ANAND MAHINDRA जो Mahindra Group के चेयरमैन हैं।


आनंद महिंद्रा महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन हैं। ये Harvard University के भूत पूर्व छात्र हैं। इन्होंने Harvard Business School से भी पढ़ाई की है। महिंद्रा ग्रुप का गठन 1945 में हुआ था। ये स्टील, ऑटोमोबाइल और ट्रैक्टर में कारोबार करते हैं। IT, हॉस्पिटैलिटी और फाइनेंशियल सर्विस में भी बिजनेस करते हैं। महिंद्रा ग्रुप के पास इस समय कुल 8 लिस्टेड कंपनियां है जिसका मार्केट कैप 1.7 लाख करोड़ से अधिक है। पिछले सप्ताह महिंद्रा ग्रुप ने फोर्ड इंडिया से एक करार किया है।


दूसरे कामयाब दिग्गज हैं ULF MARK SCHNEIDER जो कि Nestle के CEO हैं।


ULF MARK SCHNEIDER ने Harvard Business School से शिक्षा प्राप्त की है। इन्होंने Nestle के CEO रूप में साल 2016 में कमान संभाली है। गौरतलब है कि Nestle दुनिया की सबसे बड़ी फूड एंड बेवरेजेज कंपनी है। कंपनी 191 देशों में कारोबार कारोबार करती है और इसके 2000 से ज्यादा ब्रांड हैं। कंपनी के प्रसिद्ध ब्रांडमैगी, किटकैट, मंच चॉकलेट आदि हैं। इसके अलावा नेस्कैप, मिल्कमेड भी कंपनी के प्रोडक्ट हैं।


तीसरे कामयाब दिग्गज हैं AJAY BIJLI जो पीवीआर के MD&CEO हैं।


इन्होंने हिंदु कॉलेज दिल्ली से BComm किया। इन्होंने शुरू में ट्रांसपोर्ट का खानदारी कारोबार शुरु किया। इनके पिताजी प्रिया थिएटर चलाते थे। इसके बाद विलेज रोडशो नामक कंपनी से जुड़ गये और तभी 1995 में पीवीआर शुरू हुई।


PVR कंपनी स्क्रीनिंग, फिल्म निर्माण और फिल्म वितरण क्षेत्र में कारोबार करती है। यह देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स कंपनी है। कंपनी के भारत के 69 शहरों में करीब 800 स्क्रीन है और साल 2022 तक 1000 स्क्रीन्स बढ़ाने की योजना है। कंपनी ने बेहत 3डी एक्सपीरियंस के लिए D-Box company से करार किया है।


PVR की 3 सालों में सेल्स ग्रोथ 19 प्रतिशत जबकि मुनाफे में 23 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है वहीं इसके इक्विटी पर 16 प्रतिशत का रिटर्न मिला है।


चौथे कामयाब दिग्गज हैं V VAIDYANATHAN जो कि IDFC First Bank के सीईओ हैं।


वी वैद्यनाथन आईसीआईसीआई बैंक के रिटेल बिजनेस का नेतृत्व करने वाली कोर टीम का हिस्सा थे। साल 2012 में इन्होंने किशोर बियानी से Future Capital लिया। इन्होंने Future Capital का नाम बदलकर Capital First किया। 6-7 साल में भाव 120 से बढ़कर 600 तक पहुंचा है। दिसंबर 2018 में Capital First का IDFC Bank में मर्जर किया। IDFC First Bank 5 साल के ट्रांसफार्म प्लान पर काम कर रहा है


पांचवे कामयाब दिग्गज हैं Siddartha Lal  जो कि Eicher motors के MD हैं।


सिद्धार्थ लाल Eicher motors के MD हैं। इन्होंने दून स्कूल, सेंट स्टीफेंस, लीड्स यूनिवर्सिटी, UK से पढ़ाई की है। 1901 से Royal Enfield मोटरसाइकल ब्रैंड के तौर पर उभरा। 26 साल की उम्र में सिद्धार्थ लाल Royal Enfield के CEO बने। इन्होंने ग्रुप के 15 में से 13 कारोबार बेचा। इनका Royal Enfield और ट्रक कारोबार पर फोकस है।


छठवें कामयाब दिग्गज हैं Sanjeev Bajaj जो कि Bajaj Finserv के MD & CEO हैं।


संजीव बजाज 2008 से Bajaj Finserv के MD & CEO हैं। इन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से B.E. (Mech) किया है। अमेरिका के Harvard Business School से MBA भी किया है।


Bajaj Finserv कंपनी NFBC सेक्टर की दिग्गज कंपनी है। यह होम लोन, पर्सनल लोन, ऑटो लोन देती है। हेल्थ, लाइफ इंश्योरेंस कारोबार भी करती है। 10 साल में भाव 300 रुपये से बढ़कर 8300 रुपये, CAGR 40 प्रतिशत हो गया है।


Bajaj Finance 10 साल में 27 रुपये से बढ़कर 3927 रुपये और CAGR 46 प्रतिशत बढ़ा है। Bajaj Finserv का 10 साल में मुनाफा 77 करोड़ रुपये से बढ़कर 3200 करोड़ रुपये हो गया है।


सातवें कामयाब दिग्गज हैं नारायण मूर्ति जो कि Infosys के को-फाउंडर हैं।


नारायण मूर्ति इंफोसिस के को-फाउंडर और भारतीय IT इंडस्ट्रियालिस्ट हैं। इन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर और IIT कानपुर से पढ़ाई की। इंफोसिस शुरु करने से पहले IIM अहमदाबाद और पटनी कंम्पयूटर में काम किया।


नारायण मूर्ति ने 1981 में अपने 6 दोस्तों के साथ इंफोसिस की नींव रखी। इंफोसिस शुरू करने के लिए अपनी पत्नी सुधा मूर्ति से 10000 उधार लिए 10000 में शुरू हुई कंपनी का मार्केट कैप आज 3.39 लाख करोड़ रुपये है।


फॉर्चून मैगजीन की 12 greatest entrepreneuers की लिस्ट में नारायण मूर्ति का नाम शामिल है। टाइम मैगजीन ने इन्हें Father of Indian IT Sector का नाम दिया। यही नहीं नारायण मूर्ति को Padma Vibhushan and Padma Shri award से भी नवाजा गया है।


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