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टाटा मोटर्स का ब्रेक फेल, क्या हो रणनीति

प्रकाशित Fri, 08, 2019 पर 13:27  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

घरेलू बाजार से दुनिया जीतने निकली टाटा मोटर्स आज घाटा मोटर्स बन कर रह गई है। सपना तेज रफ्तार का था लेकिन सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। दिमाग की बजाय दिल से लिए गए फैसलों से कंपनी का ब्रेक फेल होता दिख रहा है। नैनो से लेकर जगुआर-लैंडरोवर ने टाटा मोटर्स का पेट्रोल ही खत्म कर दिया। तीसरी तिमाही में 27 हजार करोड़ रुपये का घाटा हुआ। ये देश की कॉरपोरेट हिस्ट्री में अब तक का सबसे बड़ा घाटा है। लोग बोल रहे हैं चल यार धक्का मार, बंद है मोटर कार! तो क्या अब इस शेयर को टाटा कर देना चाहिए या अब खरीदने का असली मौका है?


टाटा मोटर्स के नतीजे हर पैमाने पर खराब रहे हैं। एसेट्स और इन्वेस्टमेंट्स को राइट-ऑफ करने से 26950 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हुआ है। जेएलआर भी लगातार तीसरी तिमाही घाटे में रही है। जेएलआर पर एसेट और इन्वेस्टमेंट की वैल्यू कम दिखाने से नुकसान हुआ है।


जहां बाजार ने टाटा मोटर्स को 541 करोड़ रुपए के कंसोलिडेटेड मुनाफे का अनुमान लगाया था वहां कंपनी को 26961 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। पिछले साल इसी दौरान 1215 करोड़ का मुनाफा था हालांकि कंसोलिडेटेड आय 3.8 फीसदी की बढ़त के साथ 77 हजार करोड़ रुपए रही है। लेकिन कंसोलिडेटेड मार्जिन 11.5 फीसदी से फिसलकर 8.5 फीसदी पर आ गई है। वहीं जेएलआर के एसेट इंपेयरमेंट की वजह से कंपनी को 27838 करोड़ रुपए का एकमुश्त घाटा हुआ है। चीन के बाजार में चुनौती बरकरार रहने से जेएलआर को लगातार तीसरी तिमाही में घाटा झेलना पड़ा है।


वहीं कंपनी पहले ही 4500 लोगों की छंटनी का एलान कर चुकी है। कंपनी को चीन में इंवेंट्री से भारी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही ब्रेक्जिट, टैक्स और नई टेक्नोलॉजी से नुकसान उठाना पड़ा है।


टाटा मोटर्स के घाटा मोटर्स बनने के सफर पर नजर डालें तो रतन टाटा का ड्रीम प्रोजेक्ट नैनो बुरी तरह से फ्लॉप रही है। कंपनी ने दिमाग के बजाय दिल से फैसले लिए है। कंपनी के लिए नैनो का लॉन्च सबसे बड़ी भूल थी और उससे भी बड़ी भूल  नैनो को दोबारा लॉन्च करना। वहीं कंपनी पर जेएलआर खरीदने का फैसला भारी पड़ा है। घरेलू बाजार छोड़कर विदेशों में फोकस महंगा पड़ा है। कंपनी इलेक्ट्रिक कारों के मामले में बहुत पीछे है। चीन की चेरी ने भी जैगुआर की बैंड बजाई है। कंपनी ने इंडिका के बाद कोई सुपरहिट मॉडल नहीं बनाई है। एमएंडएम, डस्टर, जीप के आने से कंपनी पर मार पड़ी है।


वीकली और मंथली चार्ट पर 129 रुपये का निचला स्तर बेहद अहम है। टाटा मोटर्स 2011 के निचले स्तर पर पहुंचा चुका है।