Moneycontrol » समाचार » टैक्स

एनआरआई को बड़ी राहत, नहीं बंद होगा पीपीएफ अकाउंट

प्रकाशित Fri, 09, 2018 पर 14:02  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट मुकेश पटेल की सलाह।


पीपीएफ अकाउंट को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अपने पूराने नोटिफिकेशन को बदलते हुए नागरिक एनआरआई के पीपीएफ खाते को बंद कर दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।


मुकेश पटेल का कहना है कि सीएनबीसी-आवाज की कोशिशों का असर है। सरकार पहले सीएनबीसी-आवाज ने यह खबर दिखाई थी। अगले आदेश तक नोटिफिकेशन पर रोक लगी है। 23 फरवरी को सरकार ने नया सर्कुलर जारी करने की एलान किया है। जिसके चलते एनआरआई के पुराने पीपीएफ अकाउंट मैच्योरिटी तक जारी रहेगें। अब एनआरआई नया पीपीएफ खाता नहीं खोल सकते है।


सवालः बेटी ने मई 2006 में 50000 रुपये में वन टाइम प्रीमियम देकर इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी और 2017 में पॉलिसी सरेंडर की। करीब 1.46 लाख रुपये की राशि पर 10 फीसदी टीडीएस कट गया। क्या मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स देना होगा और आईटीआर फॉर्म के किस हेड में इसको दिखाना होगा?


मुकेश पटेल: इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है। सेक्शन 10(10डी) के तहत पॉलिसी  मैच्योरिटी पर टैक्स छूट मिल सकती है। प्रीमियम पॉलिसी की फेस वैल्यू से 10 फीसदी ज्यादा होने पर टैक्स देना होगा। 10 साल से ऊपर की समयसीमा वाली पॉलिसी पर टैक्स छूट नहीं मिलती है। इनकम टैक्स के नियमों के तहत टैक्स भरना होगा हालांकि मैच्योरिटी की पूरी रकम पर टैक्स नहीं लगेगा। 90000 रुपये की राशि पर टैक्स देना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं माना जाएगा। अन्य स्त्रोतों से आय के तहत टैक्स देना होगा। आईटीआर फॉर्म में अन्य स्त्रोतों से आय को जोड़कर टैक्स भरें। टीडीसी की कटौती पर छूट मिलेगी।


सवालः 1 नवंबर 2017 से 3 साल के लिए लंदन में हूं। अक्टूबर 2017 को भारत में सैलरी मिली जिसपर टीडीएस का भुगतान किया। लंदन की सैलरी पर भी टीडीएस दे रहा हूं। क्या वित्त वर्ष 2017-2018 के लिए भारत में और कोई टैक्स देना होगा और क्या लंदन में कमाई हुई सैलरी पर यहां भी टैक्स देना होगा?


मुकेश पटेल: इस  वित्त वर्ष भारत में 6 महीने से ज्यादा का वक्त बिताया है। नियमों के तहत भारतीय नागरिक माने जाएंगे। वित्त वर्ष 2017-2018 के तहत टैक्स रिटर्न भरना होगा। भारतीय और विदेशी सैलरी को जोड़कर टैक्स रिटर्न भरें। इनकम टैक्स विभाग को विदेश में दिए टैक्स की जानकारी दें। डबल टैक्सेशन अवॉएडेंस एग्रीमेंट के तहत क्रेडिट मिलेगा।