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Covid-19 ने बिगाड़ी टैक्स प्लानिंग, जानिए Financial Year में किन कामों के लिए कब तक पा सकते है छूट

आज देश में लॉकडाउन का 15वां दिन है। ऐसे में सरकार ने इनकम टैक्स से जुड़ी जरुरी कामों की तारीख को बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया है।
अपडेटेड Apr 08, 2020 पर 17:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इनकम टैक्स बचाने का हो टेंशन या फिर जीएसटी के पेचींदे नियमों की हो उलझन, अटका हो रिफंड या फिर मुश्किल में फंसा हो रिटर्न। हर मुश्किल सवाल का आसान जवाब है टैक्स गुरु। जहां पर ना केवल टैक्सपेयर्स अपने टैक्स की बचत करता है बल्कि टैक्स गुरु आपको टैक्स के उलझनों को सुलझाने के गुर भी सिखाते है।


कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने देश भर में 21 दिनों का लॉकडाउन लगाया है। आज देश में लॉकडाउन का  15वां दिन है। ऐसे में सरकार ने इनकम टैक्स से जुड़ी जरुरी कामों की तारीख को बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया है जिससे लोगों को ITR फाइल करने ,   LIC, मेडिक्लेम, PPF, NPS जैसे और भी अन्य कामों को पूरा करने में राहत मिली है। आइए सबसे पहले जानते है कि 30 जून तक किन कामों की डेडलाइन बढ़ी है और GST से जुड़े नियमों में बदलाव को भी समझते है टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली के साथ। साथ ही टैक्सपेयर्स की हर सवालों का भी जबाव देगें। 



30 जून तक बढ़ी इन कामों की डेडलाइन
 


कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने पैन को आधार से जोड़ने की डेडलाइन बढ़ाई गई है। 30 जून 2020 तक पैन को आधार से लिंक कर सकते हैं। ITR फाइल करने के लिए 30 जून तक का समय दिया गया है। अब 30 जून तक किए गए निवेश पर टैक्स छूट ले सकते हैं। इनकम टैक्स फाइल करने की मियाद बढ़ने के साथ ही अब टैक्सपेयर्स  एक ही बचत को दो वित्त वर्ष में क्लेम नहीं कर सकते हैं। LIC, मेडिक्लेम, PPF, NPS में 30 जून तक निवेश करने पर टैक्स छूट ले सकते है।


विवाद से विश्वास स्कीम को 30 जून 2020 तक बढ़ाया गया है। नए नियम के तहत 10% का अतिरिक्त चार्ज भी नहीं देना होगा।  जिससे पहले 31 मार्च 2020 तक ही छूट थी उसे बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया गया है। 30 जून 2020 तक देरी से भरे गए TDS के लिए ब्याज दर को 18% से घटाकर 9% किया गया है।



GST से जुड़े नियमों में बदलाव
 
इधर GST रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ाई गई है। अब मार्च, अप्रैल और मई के लिए GST रिटर्न फाइल 30 जून 2020 तक कर सकते हैं। बताड दें कि 5 करोड़ से कम सालाना टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए छूट दी गई है। देरी से GST रिटर्न भरने पर कोई ब्याज, लेट फीस और पेनल्टी नहीं लगेगी। हालांकि  5 करोड़ से ज्यादा के टर्नओवर वाली कंपनियों पर 9% की दर से ब्याज लगेगा। वहीं कंपोजिशन स्कीम का फायदा लेने के लिए भी डेडलाइन 30 जून 2020 की गई है।


नीचे कुछ टैक्सपेयर्स के जरिए सवाल पूछे गए है जिनका जवाब टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली ने दिया है।


सवालः क्या अप्रैल से जून 2020 के दौरान किए गए निवेश को मौजूदा वित्त वर्ष में क्लेम किया जा सकेगा?
 
एक्सपर्ट:
  ऐसा टैक्सपेयर्स कर सकते हैं। एक ही बचत को दो वित्त वर्ष में क्लेम न करे। 30 जून 2020 तक निवेश को मौजूदा वित्त वर्ष या पिछले वित्त वर्ष में क्लेम कर सकते हैं।


सवालः क्या वित्त वर्ष 2018-19 के लिए रिवाइज्ड या बिलेटेड रिटर्न को 30 जून तक फाइल किया जा सकता है ?  
 
एक्सपर्ट:
  एक्सपर्ट का कहना है कि CBDT ने रिटर्न फाइल करने की सीमा बढ़ाई गई है। वित्त वर्ष 2018-19 के रिटर्न 30 जून तक फाइल कर सकते हैं। इसमें रिवाइज्ड और बिलेटेड रिटर्न भी शामिल हैं।


सवालः लॉकडाउन के चलते जो जरूरी सेवाओं की डेडलाइन 30 जून 2020 तक बढ़ाई गई है, क्या उसमे सेक्शन 80D और 80G की छूट भी शामिल है ?
 
एक्सपर्ट:
30 जून 2020 तक सेक्शन 80D और 80G के तहत टैक्स बचा सकते हैं। सेक्शन 80D के तहत मेडिकल खर्चों पर और सेक्शन 80G के तहत दान की राशि पर टैक्स छूट संभव है।


सवालः लॉकडाउन के दौरान जब बैंक और पोस्ट ऑफिस बंद हैं तो ऐसे में सेक्शन 80C के तहत छूट पाने के लिए निवेश कैसे किया जाए ?


एक्सपर्ट:  सरकार की ओर से टैक्सपेयर्स को राहत मिली है। निवेश के लिए डेडलाइन को 30 जून 2020 तक बढ़ाया गया है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी निवेश कर सकते हैं।


सवालः वित्त वर्ष 2020-21 के लिए निवेश कब से करना होगा। 1 अप्रैल 2020 से या फिर 30 जून के बाद से ?
 
एक्सपर्ट
: वित्त वर्ष 2020-21 के लिए PPF में निवेश 1 अप्रैल से माना जाएगा। 1 अप्रैल से 30 जून के बीच निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिल सकती है। वित्त वर्ष 2019-20 या 2020-21 के लिए छूट क्लेम कर सकते हैं। निवेश को दोनों वित्त वर्ष में क्लेम नहीं कर सकते हैं।


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