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आर्थिक चुनौतियों का संकट, क्या मिलेगी टैक्स में राहत!

प्रकाशित Thu, 27, 2019 पर 12:13  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर।


देश का हर वोटर टैक्सपेयर्स नहीं होता लेकिन टैक्सपेयर्स वोटर जरुर होता है और इसलिए हर नई सरकार के साथ टैक्सपेयर्स की नजर होती है बजट पर। इस बार देश के टैक्सपेयर्स को मोदी सरकार से बेहद आस है कि सरकार ने जिस तरह से शानदार बहुमत के साथ दूसरे कार्यकाल की शुरूआत कर रही है उस जनता को टैक्स रिटर्न मिलेगा। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली और प्रीति खुराना।


शरद कोहली का कहना है कि टैक्स कम होने पर टैक्स का दायरा बढ़ता है। टैक्स कंप्लायंस बढ़ेगा और ज्यादा टैक्स इकट्ठा होगा। टैक्स कम से कंपनियों को ज्यादा प्रॉफिट होगा और निवेश बढ़ेगा। महिला वित्त मंत्री होने के नाते टैक्स में छूट मिल सकती है।


देश में कुल 6.86 करोड़ लोग टैक्स चुकाते है। टैक्स स्लैब को बढ़ाते ही टैक्स बेस कम होगा। शरद कोहली के मुताबिक डायरेक्ट टैक्स कोड के आने की उम्मीद जल्द है। 3 लाख रुपये तक की कमाई पर टैक्स फ्री की जा सकती है।


वहीं टैक्स कटौती की उम्मीदों पर बात करते हुए प्रीति खुराना का कहना है कि आर्थिक मोर्चे पर देखा जाएं तो चुनौतियां बहुत है। कम कमाने वाले टैक्सपेयर को ज्यादा फायदा पहुंचाना चाहिए। टॉप ब्रैकेट के टैक्सपेयर पर सरचार्ज की दर बढ़ाई जाएं। टैक्स बेस और टैक्स कलेक्शन को बढ़ाना जरुरी है।


सरकार को मजबूत कदम उठाने की जरुरत है। टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाने की जरुरत है। बजट में टैक्सपेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार को अपनी आय बढ़ाने की जरुरत है।