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एम्प्लॉई vs कंसल्टेंट, समझें क्या है टैक्स की देनदारी

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं।
अपडेटेड Jun 28, 2018 पर 14:26  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट मुकेश पटेल की सलाह।


एम्प्लॉई vs कंसल्टेंट के बीच टैक्स की देनदारी को समझाते हुए टैक्स एक्सपर्ट मुकेश पटेल का कहना है कि टैक्स के लिहाज से एम्प्लॉई या कंसल्टेंट में बड़ा फर्क है। एम्प्लॉयर से काम के बदले मिलनेवाला पैसा वेतन होता है। सैलरी पर स्टैंडर्ड डिडक्शन और दूसरी छूट मिलती है। ये छूट या बचत ज्यादा नहीं होती है।


उन्होंने आगे बताया कि कंसल्टेशन चार्जेज के नाम पर मिली रकम पर ज्यादा बचत होगी। कंसल्टेशन चार्जेज को प्रोफेशनल आय के तौर पर दिखा सकते है। सेक्शन 44एडी के तहत प्रिजम्प्टिव आय पर 50 फीसदी तक की छूट मिलती है। गाड़ी पेट्रोल, ट्रैवलिंग, ऑफिस खोलने जैसे खर्चों पर छूट मिलेगी। 50 लाख रुपये तर बही खाता या ऑडिट से जुड़े कागजात रखने की जरुरत नहीं है। कंसल्टेशन के तौर पर 20 लाख रुपये से कम के पैकेज होने पर फायदा मिलता है। 20 लाख रुपये से ज्यादा के पैकेज पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा।