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विरासत या गिफ्ट में मिला Gold बेच रहे हैं? जान लीजिए Tax का हिसाब-किताब

अगर आप विरासत या गिफ्ट में मिले सोने को बेच रहे हैं तो आपको टैक्स का गणित समझना होगा।
अपडेटेड Aug 21, 2019 पर 15:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अगर आप सोने के बढ़ते दामों को देखकर इसे बेचने का सोच रहे हैं तो पहले टैक्स का हिसाब-किताब समझ लीजिए। अगर आप विरासत या गिफ्ट में मिले सोने को बेच रहे हैं तो आपको टैक्स का गणित समझना होगा।


सोना बेचने पर यह देखा जाता है कि आपके पास यह संपत्ति कितने दिनों से थी और आपने इसे बेचकर कितना प्रॉफिट कमाया है।


अगर आपको विरासत में सोना मिला है या आपके किसी करीबी रिश्तेदार ने आपको सोना गिफ्ट किया है तब आपको इसपर टैक्स नहीं चुकाना होगा लेकिन यही सोना आप एक समय विशेष के बाद बेच रहे हैं तो आपको इस पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है क्योंकि फिर इसे कैपिटल गेन की तरह देखा जाता है और यह इनकम टैक्स रिटर्न्स फॉर्म में कैटेगरी इनकम फ्रॉम कैपिटल गेन्स क अदंर आता है।


इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स में बांटा गया है।


अगर आपने सोना 36 महीने की अवधि तक रखा है तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन हुआ। इसपर टैक्सपेयर के इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।


36 महीने की अवधि से ज्यादा सोना रखने पर इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की कैटेगरी में रखा जाएगा। इसपर इन्डेक्सेशन बेनेफिट्स के साथ 20 फीसदी टैक्स लगेगा।


गोल्ड बेचने पर कैपिटल गेन को इस फॉर्मूले से निकालते हैं-


STCG= Sale price - purchase price


LTCG= Sale price - indexed cost of purchase price


Purchase Price कैसे कैलकुलेट करें


विरासत में मिले गोल्ड के खरीद का दाम वो दाम होता है, जो आपके पुरखों ने चुकाई है।


अगर आपको ये सोना 1 अप्रैल, 2001 से पहले मिला है तो आप 1 अप्रैल, 2001 तक के सोने के Fair Market Value (FMV) या परेचज प्राइस के हिसाब से इसका वैल्यू कैलकुलेट कर सकते हैं। अगर 1 अप्रैल, 2001 के बाद आपको पुश्तैनी सोना मिला है तो आपको परचेज प्राइस पर ही इसे कैलकुलेट करना होगा।




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