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क्या आप जानते हैं कि सेकेंड होम पर टैक्स कैसे बचा सकते हैं?

अगर आपके किसी एक ही घर का पजेशन मिला है तो जो घर अंडर कंस्ट्रक्शन है उस पर आपकी कोई टैक्स लायबिलिटी नहीं बनेगी
अपडेटेड Sep 21, 2019 पर 18:42  |  स्रोत : Moneycontrol.com

घर खरीदने के बाद जैसे ही प्रॉपर्टी का पजेशन मिलता है उस घर से होने वाली कमाई आपकी टैक्सेबल इनकम में जुड़ जाती है। इस साल बजट में फाइनेंस मिनिस्टर ने कुछ ऐसे ऐलान किए थे जिससे करादाताओं को घर के मामले में राहत मिली है।


फाइनेंशियल ईयर 2019-20 से सिर्फ एक नहीं बल्कि दो घरों को सेल्फ ऑक्यूपायड माना जा सकता है। इन घरों के लिए अगर आपने होम लोन लिया है तो इनकम टैक्स के सेक्शन 24 के तहत उसके इंटरेस्ट पर टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि दोनों घरों को मिलाकर आप एक फाइनेंशियल ईयर मैक्सिमम 2 लाख रुपए के इंटरेस्ट पर ही टैक्स छूट का फायदा ले सकते हैं।


अगर आपके किसी एक ही घर का पजेशन मिला है तो जो घर अंडर कंस्ट्रक्शन है उस पर आपकी कोई टैक्स लायबिलिटी नहीं बनेगी।


अगर आप एक प्रॉपर्टी को रेंट पर लगाना चाहते हैं तो रिटर्न फाइल करते हुए आपको रेंट इनकम की जानकारी देनी होगी। यहां एक बात ध्यान रखने की है कि रेंट इनकम की जानकारी देते हुए आप लोन इंटरेस्ट और म्यूनसिपल टैक्स के बदले 30 फीसदी स्टैंडर्ड डिडक्शन कर सकते हैं।


होम लोन के समूचे इंटरेस्ट पर आप टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। अगर आपको हाउस प्रॉपर्टी से नुकसान हुआ है तो आप अदर इनकम में 2 लाख रुपए तक के लॉस को एडजस्ट कर सकते हैं। अगर आपका लॉस 2 लाख रुपए से ज्यादा है तो बाकी की रकम अगले साल एडजस्ट कर सकते हैं। 


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