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अगर आप भी करते है इंट्राडे ट्रेडिंग तो जानिए कैसे करें खुद को ऑडिट कराने की चिंता से मुक्त

इंट्राडे ट्रेडिंग करते है और आपका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है तो जानिए कैसे नियमों के दायरे में रहकर ऑडिट से राहत मिल सकती है।
अपडेटेड Mar 13, 2020 पर 10:39  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

इनकम टैक्स बचाने का हो टेंशन या फिर जीएसटी के पेचींदे नियमों की हो उलझन, अटका हो रिफंड या फिर मुश्किल में फंसा हो रिटर्न। हर मुश्किल सवाल का आसान जवाब है टैक्स गुरु। जहां पर ना केवल टैक्सपेयर्स अपने टैक्स की बचत करता है बल्कि टैक्स गुरु आपको टैक्स के उलझनों को सुलझाने के गुर भी सिखाते है।


अगर आप नियमित रुप से इंट्राडे ट्रेडिंग करते है और आपका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है ऐसे मैं तो आपको रिटर्न फाइल करना ही पड़ता है लेकिन ऑडिटिंग भी करानी पड़ती है। आज इस पर टैक्स गुरु में चर्चा होगी कि नियमों के दायरे में रहकर कैसे ऑडिट से राहत मिल सकती है। इसी पर विस्तार से चर्चा करने के लिए हमारे साथ मौजूद है टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली।


नियमों के दायरे में ऑडिट से राहत


शरद कोहली का कहना है कि टर्नओवर में खरीद-बिक्री के ट्रांजैक्शन शामिल किए जाते है। जैसे ही आपका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये को पार करता है तो वैसे ही सेक्शन 44AB के तहत टैक्स ऑडिट के नियमों को साफ तौर पर करना होता है। 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की टर्नओवर का ऑडिट जरुरी होता है। अगर 2 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर पर सेक्शन 44AD के तहत प्रिजम्टिव स्कीम का फायदा टैक्सपेयर्स उठा सकता है।


स्टॉक ट्रेडर्स की सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपय़े को पार कर रही है परंतु सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से नीचे है या फिर ट्रेडर्स 6 फीसदी या उससे ऊपर प्रॉफिट डिक्लेयर कर रहे है तो आप ऑडिट से बच सकते है लेकिन उसके लिए ट्रेडर्स को सेक्शन 44AD के तहत प्रिजम्टिव स्कीम में सुगम फॉर्म भरना होगा।


वहीं अगर आप सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपये को पार करते है और 6 फीसदी से कम प्रॉफिट डिक्लेयर कर रहे है तो आपको ITR III फाइल कर टैक्स ऑडिट करना होगा।


FY खत्म होने के बाद ITC एडजस्टमेंट


वित्त वर्ष खत्म होने के बाद क्या जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का एडजस्टमेंट किया जा सकता है? इस पर शरद कोहली का कहना है कि वित्त वर्ष समाप्ति के बाद डीलर को 6 महीने का समय दिया जाता है जिसके तहत डीलर नियमों के साथ इनपुट टैक्स क्रेडिट ( ITC) क्लेम करना संभव है। 30 सितंबर GSTR-3B फाइलिंग की आखिरी तारीख है। GSTR-9 सालाना रिटर्न फाइलिंग की डेडलाइन कई बार बढ़ी है। डेडलाइन मिस होने पर 24 फीसदी ब्याज का प्रावधान किया गया है।


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