Moneycontrol » समाचार » टैक्स

अब मोबाइल ऐप के जरिए GST रिटर्न की चोरी रोकेगी सरकार

प्रकाशित Tue, 30, 2019 पर 10:58  |  स्रोत : Moneycontrol.com

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स पर सरकार ने कई कट लगाए हैं लेकिन इनका फायदा कंज्यूमर्स तक नहीं पहुंच पा रहा है. कंज्यूमर्स की शिकायत है कि छोटे रेस्टोरेंट्स और बीटूसी टाइप यानी बिजनेस टू कंज्यूमर टाइप के व्यापारी ग्राहकों से तो GST का चार्ज ले लेते हैं लेकिन खुद सरकार को टैक्स रिटर्न नहीं करते।


अब ऐसे बिजनेस पर सरकार की नजर है। सरकार टैक्स चुराने वाले इन छोटे बिजनेसेज पर एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए नजर रखेगी।


बहुत सारे कंज्यूमर्स ने एक मोबाइल एप्लीकेशन Iris Peridot के जरिए शिकायत दर्ज कराई थी कि ऐसे छोटे रेस्टोरेंट या बिजनेसेज उनसे GST का चार्ज तो ले लेते हैं लेकिन ना टैक्स रिटर्न भरते हैं न हीं GST रिटर्न फाइल करते हैं। ये ऐप GST सुविधा प्रोवाइडर की ओर से डेवलप किया गया है। इस ऐप के जरिए कंज्यूमर किसी भी बिजनेस का यूनीक आ भरा नहीं भेजते लेटर यह आप GST सुविधा प्रोवाइडर के में डेवलप किया है इसमें मोबाइल एप्लिकेशन किसी बिजनेस का यूनीक GST आइडेंटिफिकेशन नंबर स्कैन करता है और एप्लीकेशन यूजर को पता चल जाता है कि वो बिजनेस GST रिटर्न फाइल कर रहा है या नहीं। साथ ही यह जानकारी टैक्स डिपार्टमेंट के पास भी चली जाती है।


कंज्यूमर्स की शिकायत है के अनुसार बस छोटे रेस्टोरेंट ही नहीं, बहुत से दूसरे बिजनेस या सर्विस प्रोवाइडर्स भी हैं, जो GST का चार्ज लेते हैं लेकिन खुद रिटर्न फाइल नहीं करते, जबकि सरकार की कंपोजिशन स्कीम के तहत ऐसे बिजनेस जिनका सलाना टर्नओवर अधिकतम 1.50 करोड़ है, तिमाही रिटर्न भर सकते हैं। वहीं, ऐसे बिजनेस अपने कस्टमर से GST चार्ज नहीं कर सकते। उन्हें अपने इनवॉइस पर भी यह दिखाना होता है कि वह GST चार्ज नहीं ले रहे। इस स्कीम के तहत ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर्स को अपने टर्नओवर पर एक परसेंट, रेस्टोरेंट ओनर को 5 और सर्विस प्रोवाइडर्स को 6 फीसदी GST भरना होता है। लेकिन ये बिजनेस अपने कंज्यूमर्स से GST चार्ज करते हैं और GST रिटर्न फाइल नहीं करते।