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अब 50,000 से ऊपर के Cashback पर चुकाना पड़ेगा टैक्स

प्रकाशित Fri, 28, 2019 पर 17:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन्स के फायदों में से एक है कैशबैक मिलना। ऑनलाइन शॉपिंग करते वक्त आपको UPI, e-wallets, credit/debit cards या ऐप्स के जरिए बहुत से कैशबैक ऑफर्स मिलते होंगे। ये ऑफर्स काफी कन्विंसिंग और ल्यूक्रेटिव होते हैं। लेकिन अब आपको कैशबैक पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।


कैशबैक्स खर्चों पर मिले हुए डिस्काउंट हैं। ये ट्रांजैक्शन होने के तुरंत बाद या कुछ वक्त बाद आपको ई-वॉलेट या लिंक्ड बैंक अकाउंट में आ जाते हैं। ये अमाउंट टैक्सेबल हो सकता है। बस शर्त ये है कि ये अमाउंट सालाना 50,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।


दरअसल, इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 56(2) के तहत किसी भी टैक्सपेयर का 50,000 से ज्यादा ऐसे अमाउंट पर गिफ्ट टैक्स या किसी दूसरे स्रोत से होने वाली आय की तरह टैक्स लागू होता है।


हालांकि, ये कैशबैक अगर फ्री मूवी टिकट्स, पेन ड्राइव या इयरफोन्स जैसी चीजों के रूप में मिले तो इनपर कोई टैक्स नहीं लगेगा। शर्त ये होगी कि ये प्रॉडक्ट्स टैक्सपेयर के लिए इनकम का सोर्स न हों। अगर इनसे टैक्सपेयर को इनकम होती है तो इसपर आईटी एक्ट के सेक्शन 28 (iv) के तहत उनके मार्केट वैल्यू के हिसाब से उनपर टैक्स लगेगा।


इसलिए सालाना कैशबैक का अमाउंट 50,000 से ऊपर जा रहा है तो आपको आईटीआर में इसे इनकम के तौर पर डिक्लेयर करना होगा। ऐसा न करने पर आईटी एक्ट के सेक्शन 147 के तहत आपको इसे रीअसेसमेंट करना पड़ेगा।