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डायरेक्ट टैक्स में रिफॉर्म की तैयारी, टैक्स टेररिज्म से राहत की उम्मीद

नए डायरेक्ट टैक्स कोड के जरिए नियमों और आसान बनाने की कोशिश हो रही है।
अपडेटेड Aug 23, 2019 पर 10:49  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है।


इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर।


डायरेक्ट टैक्स पर बनी टास्क फोर्स ने 21 महीने में कुल 89 बैठकों के बाद डायरेक्ट टैक्स में सुधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की जो टैक्स भरने की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाएंगा। इस पर विस्तार से बात करते हुए टैक्स एक्सपर्ट शरद कोहली ने बताया कि  1961 में इनकम टैक्स कानून बना था। मौजूदा कानून में कई नियम पुराने थे। टैक्स नियम पेचीदा, कानूनी लड़ाई में वक्त खराब होता है। पिछले सालों में आयकर विभाग ने टैक्स रिफॉर्म किए है। मौजूदा समय में Pre-Filled रिटर्न की भी शुरुआत की गई। रिटर्न फॉर्म आसान बनाने की कोशिश जारी है। अब रिफंड प्रक्रिया आसान बनाने की पहल हुई है। नए डायरेक्ट टैक्स कोड के जरिए नियमों और आसान बनाने की कोशिश हो रही है। 


टास्क फोर्स ने इस रिपोर्ट में डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (DDT) को पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की है। बता दें कि जब कंपनियां डिविडेंड देती हैं 15 फीसदी DDT लगता है। DDT के ऊपर 12 फीसदी सरचार्ज और 3 फीसदी एजुकेशन सेस लगता है। इस तरह कुल मिलाकर DDT की प्रभावी दर 20.35 फीसदी हो जाती है।


टास्क फोर्स मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स (MAT) को भी पूरी तरह से हटाने की भी सिफारिश की है। अभी कंपनी के बुक प्रॉफिट पर 18.5 फीसदी MAT लगता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115JB के तहत MAT लगता है।


टास्क फोर्स ने सभी के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर 25 फीसदी करने की सिफारिश है। टास्क फोर्स ने इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में बड़े बदलाव की भी सिफारिश की है और इनकम टैक्सपेयर्स की फेसलेस स्क्रूटनी के लिए जरूरी उपाय सुझाए हैं। इसने सिस्टम के जरिये फाइनांशियल ट्रांजैक्शन का क्रॉस वेरिफिकेशन करने के उपाय सुझाए हैं।


टास्क फोर्स का खास जोर टैक्स विवादों के जल्द निपटारे पर है। इस रिपोर्ट में जीएसटी, कस्टम, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट औऱ इनकम टैक्स के बीच जानकारी के लेनदेन की खास व्यवस्था की सिफारिश भी की गई है।


रिपोर्ट में टैक्स घटाने या दर घटाने की भी सिफारिश की गई है। टैक्सपेयर बेस बढ़ाने की कोशिश हो रही है।


फेसलेस स्क्रूटनी पर जोर


IT विभाग का फेसलेस स्क्रूटनी पर जोर दिया है। सेक्शन 142(1) और 143(2) के तहत जांच का नोटिस आता है। टैक्सपेयर के पास मैन्युअल या फेसलेस स्क्रूटनी का विकल्प है। नोटिस का जवाब भी ऑनलाइन देना होगा। सबूत के तौर पर सभी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। असेसमेंट ऑर्डर भी ऑनलाइन दिया जाता है।


अब धमकाएगा नहीं आयकर विभाग


टैक्सपेयर को बिना धमकी दिए टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की कोशिश आयकर विभाग कर रहा है जिसके लिए टैक्स विभाग अब पहले की तरह सख्ती से पेश नहीं आएगा। रिटर्न में गड़बड़ी होने पर नरम रुख अपनाया जाएगा। एसएमएस के जरिए गलती के बारे में टैक्सपेयर्स को सूचित किया जाएगा। टैक्स विभाग प्रोत्साहना के जरिए टैक्स वसूली की कोशिश करेगा।


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