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गोल्ड और टैक्स की देनदारी की है परेशानी, जानिए कैसे मिलेगा समाधान

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं।
अपडेटेड Dec 12, 2019 पर 14:19  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है।


इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर।


भारतीयों को सोने (गोल्ड) से काफी लगाव है। फिर चाहे शादी-ब्याह का मौका हो या फिर किसी को गिफ्ट देना हो, त्योहार पर खरीदारी करनी हो या फिर निवेश करना हो। भारतीयों को सोने (गोल्ड) में बेहतर विकल्प नजर आता है यानी इतना ही भारतीयों को इससे बेहतर और कोई विकल्प नहीं मिलता लेकिन जाने-अनजाने में टैक्स से जड़े नियमो को अंदाज कर दिया जाता है। यहीं नजरअंदाज करने की टैक्सपेयर्स की आदत कई बार भारी पड़ जाती है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से कई बार नोटिस आ जाती है तो कभी इसके लिए आपको पेनाल्टी का सामना करना पड़ता है। इन्हीं सभी गलतियों से बचने के लिए और गोल्ड से जुड़े टैक्स नियमों को समझाने के लिए टैक्स गुरु में मौजूद है टैक्स एक्सपर्ट प्रीति खुराना।


सोना खरीदने-बेचने पर टैक्स


प्रीति खुराना का कहना है कि घर में गोल्ड रखने की कोई सीमा नहीं है। सोना खरीदने पर पक्का बिल यानी इन्वॉयस होना जरुरी है। अगर इनकम टैक्स विभाग की और से पूछताछ होती है तो आपके पास रखा इन्वॉयस काम आएगा। सालाना 50 लाख रुपये से ज्यादा आय पर घर में रखें सोने की कीमत की जानकारी रिटर्न में देनी होगी। रिटर्न फाइल करते वक्त रिटर्न में एसेट्स और लायबिलिटी के विकल्प पर सोने की कीमत भरें। शादीशुदा महिलाओं को 500 ग्राम सोना रखने की छूट है जबकि पुरुषों को 100 ग्राम तक का सोना (गोल्ड) रखने की छूट है।


सोने पर टैक्स के नियम पर विस्तार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि सोने की बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। 3 साल पहले सोना बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं 3 साल बाद सोना बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा।


ऐसे पाएं अटका रिफंड


बैंक अकाउंट बंद होने की वजह से रिफंड अटकता है। रिटर्न वेरिफाई न होने पर भी रिफंड नहीं मिलता। ई-वेरिफिकेशन का स्टेट्स जांचना होगा। जरुरी है कि बैंक अकाउंट नबंर सही हो। टैक्सपेयर समय- समय पर ई-मेल देखते रहें। देरी से रिफंड ब्याज के साथ मिलेगा। टैक्स से 10 फीसदी से ज्यादा रिफंड होने पर ब्याज मिलेगा। 0.5 फीसदी प्रति महीन के आधार पर ब्याज मिलेगा। डेडलाइन से पहले रिटर्न फाइल कर अप्रैल से रिफंड मिलता है।


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