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टैक्स गुरु: विदेशी कमाई पर समझिए टैक्स की देनदारी

आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन।
अपडेटेड Jan 11, 2018 पर 11:48  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन


सवाल: अगर विदेशी करेंसी में किसी की कमाई होती है तो उस पर टैक्स की देनदारी क्या और कैसे होगी?


जवाब: भारतीय नागरिक की विदेश में हुई आय पर टैक्स लगता है। भारत में कमाई गई विदेशी आय पर भी टैक्स लगता है। इस पर सेक्शन 90 के तहत डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट के तहत राहत मिलती है। शेड्यूल एफएसआई के तहत विदेशी कमाई का स्रोत बताना जरूरी होता है। वहीं, शेड्यूल एफए के तहत विदेशी बैंक खाते की जानकारी देनी भी जरूरी होती है। साल 2005 में विदेशी कमाई पर दी जाने वाली छूट पर रोक लगा दी गई। हालांकि 80 आरआरबी के तहत पेटेंट होने पर 3 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है।


सवाल: मेरा बेटा टूरिंग और ट्रेनिंग के लिए इस साल कई देश गया है। उसको विदेशी कंपनियों से रिम्बर्समेंट भी मिला है, टैक्स लायबिलिटी क्या होगी?


जवाब: साल में 182 दिन से ज्यादा भारत में रहे तो रेसिडेंट का दर्जा होता है। आपने बेटे पर निवासी भारतीय की तरह ही टैक्स लगेगा। बता दें कि किसी भारतीय की विदेशी आय पर भी टैक्स लगता है। रिम्बर्समेंट पर कोई टैक्स नहीं लगता। रिम्बर्समेंट की जानकारी आईटीआर में देनी जरूरी नहीं है। विदेशी और भारतीय आय मिलाकर 2.5 लाख से ज्यादा होने पर आईटीआर भरने की जरूरत होती है।