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टैक्स गुरुः ना भूले आईटीआर रिटर्न की डेडलाइन

प्रकाशित Thu, 12, 2018 पर 14:37  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट प्रीति खुराना की सलाह।


31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करना क्यों जरुरी है इसपर बात करते हुए  टैक्स एक्सपर्ट प्रीति खुराना का कहना है कि 31 जुलाई तक रिटर्न भरना इसलिए जरुरी है क्योंकि रिटर्न पाइल करने में देरी से 5000 रुपये तक का जुर्माना भरना पडेगा। वहीं 31 दिसंबर तक रिटर्न नहीं भरने पर 10000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। 5 साख रुपये या उससे कम आय पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना देना होगा। जुर्माना देने के बाद ही रिटर्न जमा होगा। इस वित्त वर्ष से नियमों में सख्ती की गई है।


उन्होंने आगे बताया कि इस साल रिटर्न के नियमों में काफी बदलाव किए गए है जिसके तहत आईटीआर-I में सैलरी का ब्रेकअप देना होगा। सैलरी, भत्ते और सुविधाओं की जानकारी दीजिए। सभी जानकारी फॉर्म 16 में मिलेगी। फॉर्म 16 के जरिए आईटीआर-I भरने में आसानी होगी। बिना फॉर्म 16 के बिना कैसे रिटर्न भरा जा सकता है? इसपर बात करते हुए उन्होंने आगे बताया कि सैलरी स्लिप और टैक्स स्टेटमेंट होनो चाहिए। बैंक अकाउंट में प्रति माह की राशि की जानकारी रखिए। ग्रॉस सैलरी, भत्ते और एचआरए को जोड़िए। फॉर्म 26एएस से राशि का मिलान कीजिए।


आईटीआर फॉर्म कैसे चुनें? इस पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आय के आधार पर आईटीआर फॉर्म चुने जाते है। सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और कैपिटल गेन न होने पर आईटीआर-I भरे। एनआरआई या 50 लाख रुपये से ज्यादा आय होने पर आईटीआर-II भरना होगा। व्यापारियों को आईटीआर-III भरना होगा। प्रिजम्प्टिव इनकम वालों को आईटीआर-IV भरना होगा।


प्रीति खुराना का कहना है कि टैक्स की देनदारी स्लैब के हिसाव से कीजिए। 2.5 लाख रुपये से ज्यादा इनकम पर रिटर्न अनिवार्य है। सभी तरह की आय को जोड़ना होगा। सेक्शन 80सी से लेकर 80यू तक मिलने वाली किसी भी छूट को ना जोड़े। अगर आपको नुकसान को आगे एडजस्ट करना है तो भी रिटर्न भरना होगा।


टीडीएस कटने पर भी रिटर्न फाइल करना जरुरी है। रिफंड पाने के लिए रिटर्न भरना होगा। उन्होंने आगे बताया कि बैंक से मिले ब्याज की जानकारी देना ना भूलें। ब्याज आय की जानकारी रिटर्न में देना जरुरी है क्योंकि रिटर्न भरना हर नागरिक की जानकारी है। रिटर्न भरने के बाद उसे वेरिफाई जरुर करें। ई-वेरिफिकेशन के जरिए प्रक्रिया बेहद आसान है। 26एएस में टीडीएस से जुड़ी राशि रिटर्न में दिखनी चाहिए। राशि नहीं दिखी तो टीडीएस का क्रेडिट नहीं मिलेगा।