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टैक्स गुरुः बिना रीइंबर्समेंट बिल, बढ़ेगी परेशानी

प्रकाशित Mon, 28, 2018 पर 13:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

टैक्स एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम आदमी ही नहीं जानकार भी घबराने लगते हैं। कारण है कि आयकर कानूनों में इतने सारे पेंच है कि किसी के लिए भी इन्हें समझना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इनकम टैक्स भरने का समय करीब आ रहा है जरुरी है कि आप इनसे जुड़े नियमों में बदलाव को जाने और समझें। ऐसे ही मौकों पर टैक्स गुरू अपनी जानकारी और अनुभव का खजाना लेकर आते हैं और करते हैं टैक्स से जुड़ी मुश्किलों को दूर। आज आपके टैक्स से जुड़े मुश्किल सवालों का जवाब देंगे टैक्स एक्सपर्ट हिमांशु कुमार की सलाह।


रीइंबर्समेंट के बिल को अब से सावधानी से संभाल कर रखना क्यों जरुरी है इसपर बात करते हुए टैक्स एक्सपर्ट हिमांशु कुमार का कहना है कि इस महीने रीइंबर्समेंट पर आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला आया, जिसके तहत इस वित्त वर्ष से एक मुश्त खर्चे को साबित करना होगा। हालांकि पहले भी एक मुश्त राशि के बिल जाते थे ,लेकिन अब आपको आपके खर्चें को साबित करने के लिए बिल रखना जरुरी है। क्योंकि ऐसा नहीं होता यानि अगर आप अपने खर्च की राशि को साबित करने में नाकाम रहते है तो आपकी राशि टैक्सेबल होगी। सेक्शन 10 के तहत डेली अलाउंस पर छूट मिलती है।


उन्होंने आगे बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद खर्चे के सभी बिल जमा करना बेहद जरुरी है। एम्पलॉयर को भी एम्प्लॉई के बिल की जांच करनी होगी। आईटीआर-1 फॉर्म के दूसरे कॉलम में जानकारी भरने की जरुरत नहीं है।


सवालः अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1 लाख रुपये से ज्यादा हो तो टैक्स कैसे जोड़े और अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन 1 लाख रुपये से कम है तो क्या ग्रॉस इनकम में जोड़ा जाएगा?


हिमांशु कुमार: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के लिए आईटीआर-2 फॉर्म भरना होगा। 1लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। 1 लाख रुपये से उपर की कमाई पर 10 फीसदी टैक्स कटेगा। इनकम टैक्स स्लैब से इसका कोई संबंध नहीं है।