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जानिए अरुण जेटली के बजट से आपको क्या-क्या मिला था?

प्रकाशित Wed, 26, 2019 पर 12:36  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अरुण जेटली को दी गई थी। खराब सेहत के कारण जेटली आखिरी बजट पेश नहीं कर पाए थे। लेकिन उससे पहले के बजट में उन्होंने कई अहम फैसले किए थे। इस साल निर्मला सीतारमण 5 जुलाई को बजट पेश करने वाली हैं। नए बजट से पहले जान लीजिए कि अरुण जेटली ने पांच साल में क्या-क्या फैसले लिए थे।


अरुण जेटली का पहला साल


जुलाई 2014 के अपने पहले बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए कर दी गई है। छोटे करदाताओं के लिए यह बहुत बड़ी राहत थी। वहीं सीनियर सिटिजंस के लिए कर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए कर दी गई है।


इनकम टैक्स की धारा 80C में निवेश की सीमा1.1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दी गई है।


होम लोन की बात करें तो इसके इंटरेस्ट पर मिलने वाली छूट को 1.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 2 लाख रुपए कर दिया गया।


इन फैसलों के अलावा जेटली ने इनकम टैक्स के नियमों में बदलाव किया था ताकि कर चोरी पर लगाम लगाया जा सके।


2015-16 में पहला फुल बजट


अरुण जेटली ने अपने इस बजट मे अमीरों को बड़ा झटका दिया था। जेटली ने वेल्थ टैक्स हटाकर उसकी जगह सरचार्ज लगाया और वो भी 2 फीसदी ज्यादा। हालांकि इस दौरान उन्होंने छोटे करदाताओं के लिए इनकम टैक्स की रेट में कोई बदलाव नहीं किया। उन्होंने 1 करोड़ से ज्यादा आमदनी वाले टैक्सपेयर्स पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया।


इस बजट में छोटे करदाताओं के लिए जेटली ने कुछ और फैसले भी किए थे।
ट्रांसपोर्ट अलाउंस 800 रुपए से बढ़ाकर 1600 रुपए मंथली कर दिया। नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) को बढ़ावा देने के लिए जेटली ने 50,000 रुपए के निवेश पर अतिरिक्त कर छूट का फायदा दिया। यानी अगर आप NPS में निवेश करते हैं तो 2.50 लाख रुपए की जगह 3 लाख रुपए पर कर छूट मिलेगा।


बुजुर्गों के लिए किसी खास बीमारी के इलाज पर मिलने वाले टैक्स छूट की सीमा 60,000 रुपए से बढ़ाकर 80,000 रुपए कर दिया।   


बजट 2016-17


इस साल बजट में जेटली ने अमीरों को और झटका दिया। जेटल ने 1 करोड़ रुपए से ज्यादा टैक्सेबल आमदनी पर सरचार्ज 12 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। इसका मतलब यह था कि अगर टैक्सेबल इनकम 1 करोड़ रुपए से ज्यादा है तो टोटल टैक्स 35.54 फीसदी लगेगा।


जेटली ने इस बजट में भी आम आदमी को राहत दिया। जिन करदाताओं के पास अपना घर नहीं था या कंपनी की तरफ से हाउस रेंट अलाउंस नहीं मिलता था, उनके लिए टैक्स फ्री रेंट की सीमा बढ़ाकर 60,000 रुपए कर दिया था।


5 लाख रुपए से कम आमदनी वाले लोगों को टैक्स छूट कम करने के लिए जेटली ने 87A के तहत मिलने वाले छूट को 2000 रुपए से बढ़ाकर 5000 रुपए कर दिया।


इस बजट की खास बात ये थी कि जेटली ने इनकम टैक्स डिक्लयरेन स्कीम, 2016 के जरिए करदाताओं को आमदनी की सही जानकारी देने का मौका दिया। यह स्कीम 1 जून 2016 से लागू हुई थी। सरकार ने डिक्लयरेशन के लिए 4 महीने का वक्त दिया था। इसके बाद घोषित आमदनी में गड़बड़ी होने पर 30 फीसदी टैक्स के साथ 15 फीसदी पेनाल्टी चुकाना पड़ता।


2017-18 का बजट


इस बजट में जेटली ने फिर अमीरों पर टैक्स का बोझ बढ़ा दिया। फाइनेंस मिनिस्टर ने 50 लाख से 1 करोड़ टैक्सेबल इनकम पर 10 फीसदी सरचार्ज लगा दिया।


हालांकि इस दौरान उन्होंने छोटे करदाताओं को राहत दी। 2.5 लाख रुपए से 5 लाख रुपए तक के टैक्सेबल इनकम पर टैक्स रेट 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया।


जेटली का आखिरी बजट


2018-19 के बजट में जेटली ने स्टैंडर्ड डिडक्शन दोबारा लागू कर दिया जो 2005 में खत्म कर दिया गया था। जेटली ने 15,000 रुपए मेडिकल एक्सपेंस और 19,200 रुपए का ट्रांसपोर्ट अलाउंस हटाकर 40,000 रुपए का स्टैडर्ड डिडक्शन लागू कर दिया।