कौन है काबुल एयरपोर्ट धमाकों का मास्टरमाइंड ISIS-K? अमेरिका और तालिबान दोनों के लिए रहा सिरदर्द - isis-k fourth deadliest terrorist organization 77 attacks in 4 months behind kabul airport blast | Moneycontrol Hindi

कौन है काबुल एयरपोर्ट धमाकों का मास्टरमाइंड ISIS-K? अमेरिका और तालिबान दोनों के लिए रहा सिरदर्द

ISIS-K ने गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे के बाहर घातक आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी ली है

अपडेटेड Aug 28, 2021 पर 9:23 AM | स्रोत :Moneycontrol.com
कौन है काबुल एयरपोर्ट धमाकों का मास्टरमाइंड ISIS-K? अमेरिका और तालिबान दोनों के लिए रहा सिरदर्द

ISIS, जिसका नाम सुनते ही दिमाग लोगों की बेहरहमी से हत्या और मारकाट तस्वीर चलने लगती हैं। इसी आतंकी संगठन का एक सहयोगी ISIS-K, आज चर्चाओं में है और कारण है गुरुवार को अफगानिस्तान में हुए आत्मघाती हमले। कुछ ही सालों में इस संगठन ने अफगानिस्तान अस्थिरता पर कब्जा कर लिया है और इस इलाके के सबसे खतरनाक आतंकवादी समूहों में से एक बन गया। ISIS-K ने गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे के बाहर घातक आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी ली है। इन धमाकों में 13 अमेरिकी सैनिकों और 90 से ज्यादा अफगानी नागरिकों जान चली गई।

इस घटना को ISIS-K का अब तक सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इसका बदलना लेने की बात कही है। मगर ISIS-खुरासान के नाम से जाना जाने वाला ये ग्रुप 2015 के अपने गठन के बाद से ही हजारों मौतों के लिए जिम्मेदार रहा है।

इसके मेंबर्स सेंट्रल एशिया में काम करते हैं। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस के अनुसार, 2018 में इसे दुनिया के चौथे सबसे घातक आतंकी समूह का दर्जा दिया गया था, जिसने 1,000 से ज्यादा लोगों की जान ली थी और इसमें ज्यादातर अफगानिस्तान के थे।

तब से इस समूह का बढ़ना सीमित रहा है और इसके उग्रवादियों ने तालिबान से ही लड़ाई लड़ी है, लेकिन उन्होंने हाल के महीनों में अफगानिस्तान में पैदा हुई अस्थिरता का फायदा, घातक हमले करने के लिए उठाया और विदेशी सैनिकों की वापसी से आशंका है कि ये संगठन अब ताकत हासिल कर लेगा।

कैसे बना ISIS-K?

ये संगठन ISIS की ही एक ब्रांट है। ISIS वो आतंकवादी समूह, जो पहली बार सीरिया और इराक में उभरा और फिर अपने चरम पर पहुंचने के बाद उसने पश्चिमी सीरिया से इराक की राजधानी बगदाद के बाहरी इलाके तक फैले एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने CNN को बताया था कि ISIS-K में "सीरिया और दूसरे विदेशी आतंकवादी लड़ाकों की एक छोटी संख्या में अनुभवी जिहादी शामिल हैं।" उन्होंने ये भी बताया कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में उनके टॉप लड़ाकों में से 10 से 15 की पहचान भी की थी।

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, इसके शुरुआती सदस्यों में पाकिस्तानी आतंकवादी शामिल थे, जो लगभग एक दशक पहले अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में उभरे थे, जिनमें से कई पाकिस्तान से भाग आए थे और दूसरे आतंकी समूहों से अलग हो गए थे।

आतंकवाद विरोधी विश्लेषकों (Counter Terrorism Experts) का अनुमान है कि अब इसकी ताकत लगभग 1,500-2,000 है, लेकिन ये संख्या जल्द ही बढ़ सकती है। कुछ पकड़े गए ISIS-K लड़ाके काबुल के पास जेलों में रखे गए थे। तालिबान ने हाल ही में अपने हमलों के दौरान इन जेलों पर भी धावा बोला था।

किन हमलों के लिए जिम्मेदार है ISIS-K?

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, ISIS-K ने इस साल के पहले चार महीनों में 77 हमले किए। समूह ने अफगानिस्तान में नागरिकों पर सबसे घातक हमलों में से कुछ को अंजाम दिया है, राजधानी काबुल में कई बड़े पैमाने पर आत्मघाती बम विस्फोट किए हैं। ISIS-K 2018 के आसपास अपने चरम पर था।

उसी साल जुलाई में, पाकिस्तान के मस्तुंग में एक चुनावी रैली में ISIS-K के आत्मघाती हमलावर ने 128 लोगों को मार डाला, जो 2018 में दुनिया में कहीं भी सबसे खूनी हमलों में से एक था।

अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS-K आत्मघाती बम विस्फोटों पर बहुत ज्यादा निर्भर था। गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे पर हुए विस्फोटों में भी इसने उसी रणनीति का इस्तेमाल किया।

रिपोर्ट में पाया गया कि 2018 में इसने ने सार्वजनिक स्थानों पर 15 हमले किए और 393 लोग मारे गए। उनमें 11 सितंबर, 2001 के हमलों की बरसी पर अफगानिस्तान के नंगरहार में एक बड़ी पब्लिक रैली में हुआ बम विस्फोट भी शामिल था, जिसमें 68 लोग मारे गए थे।

इसके बाद अमेरिका ने पूरे क्षेत्र में इसके लड़ाकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया और समूह की ताकत में गिरावट आई, लेकिन 2019 में, US सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल जोसेफ वोटेल ने ISIS-K को एक बड़ा खतरा बताया।

इकोनॉमिक्स एंड पीस ने चेतावनी दी कि ISIS-K की गिरावट के बावजूद, ये माना जाता था कि काबुल और जलालाबाद जैसे शहरों में अभी भी इसके स्लीपर सेल हैं और इसके आतंकवादी तालिबान के लिए खतरा बने रहे थे।

समूह ने हाल के सालों में पूर्वी अफगानिस्तान में विशेष रूप से नंगहर और कुनार प्रांतों में अपनी मौजदगी दर्ज कराई है। इसी कड़ी में पिछले अगस्त में, ISIS-K ने अपने दर्जनों समर्थकों को छुड़ाने की कोशिश में, नंगहर की राजधानी जलालाबाद में मुख्य जेल पर हमला किया, जिन्हें अफगान सेना और पुलिस ने पकड़ लिया था।

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First Published: Aug 27, 2021 6:41 PM

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