शादी का असर आपके क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है, जानिए इसकी क्या है वजह

शादी के बाद कई बार ज्वाइंट बैंक अकाउंट ओपन करते हैं। कई लोग होम लोन पत्नी के साथ मिलकर लेते हैं। इसमें होम लोन ज्वाइंट नाम से होता है। इसका मतलब है कि होम लोन चुकाने की जिम्मेदारी सिर्फ पति या पत्नी पर नहीं बल्कि दोनों पर होगी

अपडेटेड Dec 17, 2024 पर 2:52 PM
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ज्वाइंट क्रेडिट अकाउंट का असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर भी पड़ता है।

क्या आप जानते हैं कि आपके क्रेडिट स्कोर पर शादी का भी असर पड़ता है। यह सुनने में अटपटा लग सकता है लेकिन यह बिल्कुल सच है। इसलिए अगर आप शादी के बाद भी अपने क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाए रखना चाहते हैं तो इस बारे में अच्छी तरह से जान लेना जरूरी है। क्रेडिट स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। यह जितना ज्यादा होगा, उतना अच्छा होगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

शादी के बाद ज्वाइंट अकाउंट आम बात है

शादी के बाद कई बार ज्वाइंट बैंक अकाउंट (Joint Bank Account) ओपन करते हैं। कई लोग होम लोन पत्नी के साथ मिलकर लेते हैं। इसमें होम लोन ज्वाइंट नाम (Joint Home Loan Account) से होता है। इसका मतलब है कि होम लोन चुकाने की जिम्मेदारी सिर्फ पति या पत्नी पर नहीं बल्कि दोनों पर होगी। ACX के फाउंडर सतीश मेहता ने कहा कि अगर पति पत्नी के साथ मिलकर होम लोन के लिए अप्लाई करता है तो बैंक दोनों के क्रेडिट स्कोर (Credit Score) को देखते हैं। अगर दोनों में से किसी एक क्रेडिट स्कोर कम है तो बैंक होम लोन का इंटरेस्ट बढ़ा सकता है। साथ ही इससे लोन अप्लिकेशन के एप्रूव होने की संभावना भी कम हो जाती है।


पति और पत्नी दोनों के अच्छे क्रेडिट स्कोर के फायदे

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पति और पत्नी दोनों का क्रेडिट स्कोर अच्छा है तो इससे न सिर्फ लोन एप्रूव होने की संभावना बढ़ जाती है बल्कि बैंक इंटरेस्ट रेट में भी रियायत देता है। डिजिटल लेंडिंग कंसल्टेंट पारिजात गर्ग ने कहा कि बैंक लोन के रिपेमेंट में कंट्रिब्यूशन के अनुपात के आधार पर ज्वाइंट अप्लिकेशन में दोनों के क्रेडिट स्कोर पर गौर करते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपके होम लोन के रिपेमेंट में आपकी पत्नी का कंट्रिब्यूशन 60 फीसदी है तो उनके क्रेडिट स्कोर को बैंक ज्यादा महत्व देगा। इसी तरह अगर उनका कंट्रिब्यूशन सिर्फ 25 फीसदी है तो बैंक उनके क्रेडिट स्कोर को कम महत्व देगा।

क्रेडिट यूटिलाइजेसन रेशियो पर भी पड़ता है असर

ज्वाइंट क्रेडिट अकाउंट का असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर भी पड़ता है। इस रेशियो का मतलब यह है कि आपकी कुल क्रेडिट लिमिट में से आप कितने का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्टेबलइनवेस्टर्स के फाउंडर देव आशीष ने कहा, "क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो कम होने का मतलब है कि रुपये-पैसे के मामले में व्यक्ति का व्यवहार जिम्मेदारी वाला है। इसके उलट हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो का मतलब है कि व्यक्ति रुपये-पैसे के मामले में दवाब का सामना करता है।"

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कम क्रेडिट स्कोर होने पर इम्प्रूवमेंट के उपाय जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि शादी के बाद पति और पत्नी दोनों को अपने क्रेडिट स्कोर का ख्याल रखना जरूरी है। अगर दोनों में से किसी एक का क्रेडिट स्कोर कम है तो उसकी वजह जानने की जरूरत है। फिर उसे इम्प्रूव करने की कोशिश होनी चाहिए। इससे दोनों का क्रेडिट स्कोर बेहतर रहेगा। फिर होम लोन या किसी दूसरे ज्वाइंट लोन के मामले में लोन एप्रूव होने की संभावना ज्यादा होगी। साथ ही इंटरेस्ट रेट में भी रियायत मिलेगी।

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