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इंश्योरेंस और निवेश में न करें देरी ताकि 60 के बाद भी बनी रहे ठाठ

हर बडे बुजुर्ग की जिंदगी कैसे आर्थिक तौर से आजाद रहें, कैसे वो अपनी सेहत की देखरेख कर सकें, इन्हीं बारीकियों पर सीएनबीसी-आवाज़ में चर्चा करेंगें।
अपडेटेड Oct 03, 2019 पर 14:28  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

घर के बडे  बुजुर्ग हमेशा परिवार के सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं। INTERNATIONAL DAY FOR OLD PEOPLE के मौके पर, हर बडे बुजुर्ग की जिंदगी कैसे आर्थिक तौर से आजाद रहें, कैसे वो अपनी सेहत की देखरेख कर सकें, इन्हीं बारीकियों पर सीएनबीसी-आवाज़ में चर्चा करेंगें। योर मनी पर international day for old people का खास आयोजन किया जा रहा है जिसमें 60 के बाद, कैसे जीयें खुलके इस पर बात होगी। वरिष्ठ नागरिकों के लिए 60 के बाद इंश्योरेंस से लेकर निवेश रणनीति बताने के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ PolicyX.com के CEO और फाउंडर नवल गोयल और Optima Money Managers के मैनेजिंग एडिटर पंकज मठपाल जुड़ गये हैं।


सिनियर सिटीजन के लिए इंश्योरेंस


बुजुर्गों के लिए इंश्योरेंस जरूरी है। 60 के बाद प्लान मिलना मुश्किल हो जाता है इसलिए कम उम्र में ही इंश्योरेंस ले लेना चाहिए। इश्योरेंस लेते वक्त प्लान में राशि पर ध्यान दें, कैपिंग पर नहीं। प्री-एक्सिस्टिंग बीमारी, वेटिंग पीरियड को समझना चाहिए। को पेमेंट के विकल्प चुन सकते हैं। इसके लिए Star Health, Religare की पॉलिसी खरीदनी चाहिए।


माता-पिता के लिए ग्रुप इंश्योरेंस


ग्रुप इंश्योरेंस के तहत कंपनी के प्लान में माता पिता को शामिल करें। ऑफिस से मिले हेल्थ प्लान में मेडिकल टेस्ट नहीं कराना होता है। ग्रुप प्लान का गिफ्ट देकर अपना फर्ज निभाएं।


गंभीर बीमारी का कवरेज


बता दें कि बीमारी के बाद पॉलिसी मिलना मुश्किल होता है इसलिए जब फिट हो तभी इंश्योरेंस ले लें। कुछ बीमारियों के लिए पब्लिक सेक्टर कंपनियों का कवरेज मिलता है हालांकि प्राइवेट सेक्टर कंपनी पॉलिसी देने में हिचकिचाती हैं।


हेल्थ इंश्योरेंस के लिए रखें ध्यान


हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सम एश्योर्ड का ध्यान रखना चाहिए। इसके साथ ही सही कंपनी और प्लान चुनना चाहिए। पहले से मौजूद बीमारी का कवरेज भी लेना चाहिए। वहीं, लाइफ इंश्योरेंस के लिए क्लेम रेश्यो, पॉलिसी अवधि और एड-ऑन कवर पर ध्यान देना चाहिए।


बुजुर्गों को आर्थिक आजा़दी


बजुर्गों को आर्थिक आजादी देने के लिए PPF में से 60 प्रतिशत पैसा निकालना चाहिए। हालांकि PPF में निवेश जारी रखें। PPF खाते को 5 साल बढ़ा सकते हैं। इसमें से 60 प्रतिशत निवेश निकाल सकते हैं। PPF पर निकासी टैक्स फ्री होती है।


NPS, एन्युटी प्लान और इक्विटी में डाइवर्सिफिकेशन होता है। इक्विटी एक्सपोजर के लिए NPS एक विकल्प है। FD में 50,000 तक के जमा पर टैक्स नहीं लगता है। इक्विटी सेविंग स्कीम में निवेश कर सकते हैं। हाइब्रिड स्कीम में निवेश एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।


PM व्यय वंदना में निवेश


इस स्कीम में 15 लाख तक निवेश कर सकते हैं। 10 साल की निवेश अवधि होती है। मासिक, छिमाही, तिमाही, सालाना भुगतान का विकल्प मौजूद है। 5,000 तक का पेंशन लेने का विकल्प भी रहता है। हालांकि इसमें रिटर्न पर टैक्स लगेगा।


सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम


इसके तहत SCSS में 5 साल से लिए निवेश करें। SCSS में 15 लाख की निवेश सीमा होती है। 5 साल में मैच्यूरिटी होती है। इसमें ब्याज दर 8.60 प्रतिशत होती है। इसमें ब्याज की कमाई पर टैक्स लगता है।


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