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जानें क्यों बंद हुआ पीएमसी बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक खाताधारक हैं कितने सुरक्षित

RBI ने PMC बैंक को नए डिपॉजिट लेने से रोक दिया है। खाताधारक 6 महीने में 1,000 से ज्यादा रकम नहीं निकाल पाएंगे।
अपडेटेड Sep 25, 2019 पर 15:55  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

वित्त वर्ष 2017-18 में DICGC यानी Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation ने 18 cooperative बैंको के 43 crore के क्लैम सेटल किए हैं। DICGC एक बॉडी है, जो आपके बैंकों में पडे़ डिपॉजिट का इंश्योरेंस करती है। यानी अगर बैंक दिवालिया हो जाए, तो आपके कूल जमा का कम से कम 1 लाख रूपए तक की राशि आपको मिल सके। योर मनी पर आज सीएनबीसी-आवाज़ के इस खास शो में पंजाब और महाराष्ट्र Co-op Bank पर RBI  पर पडी गाज पर विस्तार से बात करेंगें।


पंजाब और महाराष्ट्र Co-op Bank यानी PMC पर RBI ने डंडा चलाया है। RBI ने 6 महीने के लिए बैंक के सारे कामकाज पर रोक लगा दी है। खाताधारकों को बड़ा झटका देते हुए 6 महीने में सिर्फ 1000 रुपए से ज्यादा पैसा निकालने पर रोक लगा दी है। जिससे बैंक के खाताधारको को परेशानी हो रही है। लोगों ने कई जगह हंगामा किया।


बंद हुआ PMC बैंक


RBI ने PMC बैंक को नए डिपॉजिट लेने से रोक दिया है। खाताधारक 6 महीने में 1,000 से ज्यादा रकम नहीं निकाल पाएंगे। PMC बैंक के बाहर खाताधारकों ने हंगामा किया। मुंबई में PMC के कई ब्रांच के बाहर हंगामा हुआ। PMC के खातों में गड़बड़ी पर RBI की कार्रवाई हुई है।


किन शहरों में कितनी ब्रांच


ब्रान्च                 संख्या
महाराष्ट्र               103
कर्नाटट                15
गोवा                   6
दिल्ली                  6


RBI के घेरे में PMC बैंक


RBI ने बैंक में कुछ अनियमिताएं पाईं हैं जिसके बाद अनियमितताओं के चलते बैंक के कामकाज पर रोक लगा दी गई है। बैंक में 11,500 करोड़ का डिपॉजिट है। बैंक में करीब 8,500 का लोन है। RBI ने यह नहीं बताया जांच में क्या पाया गया है। पिछले साल NPA 1 प्रतिशत-1.5 प्रतिशत से बढ़कर 4 प्रतिशत हो गया था। अगले 6 महीने तक बैंक नया डिपॉजिट नहीं लेगा। बैंक ना लोन दे पाएगा, ना एसेट बेच सकता है। जांच के बाद जमा पैसे की जानकारी मिलेगी। जमाकर्ताओं के पैसों की सुरक्षा पर अनिश्चितता बनी हुई है। जमा पैसों की सुरक्षा पर अभी कुछ कहना मुश्किल है।


को-ऑपरेटिव बैंक खाताधारक कितने सुरक्षित?


को-ऑपरेटिव बैंक गांव और शहर में काम करते हैं। ये बैंकस्थानीय समुदायों को छोटे कर्ज मुहैया कराते हैं। कमर्शियल बैंक के नियम को-ऑपरेटिव बैंक पर लागू होते हैं। सभी बैंकों को RBI रेगुलेट करता है


को-ऑपरेटिव बैंक में दिक्कत


पूरे सेक्टर पर कमजोर कॉरपोरेट गवर्नेंस होती है। टेक्नोलॉजी के साथ कदम ना मिलाकर चलने से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कमजोर होती अर्थव्यवस्था से NPA बढ़ने की चिंता बनी हुई है।


को-ऑपरेटिव बैंक के खाताधारक को सलाह


कमर्शियल बैंक के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर मिलती है। डिपॉजिट से पहले बैंक की वित्तीय हालत जरूर देखना चाहिए। को-ऑपरेटिव बैंक के ग्रॉस NPA, नेट NPA जरूर देखना चाहिए। ADR समेत सभी डिटेल ऑनलाइन उपलब्ध होती है।


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