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किराए पर फर्नीचर लेना क्या वाकई फायदेमंद है?

रेंटमोजो, फर्लेंको, सिटीफर्निश जैसी किराए पर फर्नीचर देने वाली कंपनियों से सेवा लेने से पहले आपको इनके अतिरिक्त शुल्क और चार्जेज को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। अगर आप मासिक किराया चुकाने में नाकाम रहते हैं तो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ सकता है
अपडेटेड Nov 20, 2020 पर 12:15  |  स्रोत : Moneycontrol.com

हीरल थानावाला


पिछले साल सितंबर में पुणे के जयेश गुप्ता किराए के घर से अपने घर में शिफ्ट हो गए थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और तीन साल का बच्चा है।


नए घर में शिफ्ट होने के बाद उनके सामने एक बड़ी उलझन यह थी कि क्या उन्हें फर्नीचर की खरीदारी करनी चाहिए या इसे रेंट पर लेना चाहिए।


गुप्ता बताते हैं, “मैंने डबल बेड, वॉर्डरोब जैसे जरूरी फर्नीचर को खरीदने के खर्च का पता किया। इस पर मुझे करीब 35,000 रुपये खर्च करने पड़ते। यही फर्नीचर मुझे फर्नीचर रेंटिंग कंपनियों से 3,000 रुपये महीने के किराए पर मिल रहा था।” उन्होंने नए घर के लिए किराए का फर्नीचर लेने का विकल्प चुना।


मिलेनियल्स और न्यूक्लियर परिवारों के बीच किराए पर फर्नीचर लेने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। रेंटमोजो, फर्लेंको और सिटीफर्निश जैसी कई कंपनियों के फर्नीचर रेंटिंग के मार्केट में कूदने से लोगों के सामने किराए पर फर्नीचर लेने का एक बड़ा विकल्प पैदा हुआ है। ये कंपनियां मेट्रो के साथ ही टियर-2 शहरों में भी कंज्यूमर्स को फर्नीचर किराए पर लेने के लिए आकर्षित कर रही हैं।


मौजूदा महामारी के दौर में अगर आप घर से काम कर रहे हैं या नई नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर में जा रहे हैं और किराए पर फर्नीचर लेने की सोच रहे हैं तो कुछ चीजों को ध्यान में रखने की जरूरत है।


किराए पर फर्नीचर लेने से जुड़ी हुई हम कुछ ऐसी ही अहम जानकारियां आपको दे रहे हैं जो आपके लिए मददगार साबित हो सकती हैं।


किराए पर फर्नीचर लेने का क्या खर्च बैठता है?


कंपनियां आपको फर्नीचर, एप्लायंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिटनेस इक्विपमेंट समेत दूसरी लाइफस्टाइल की जरूरतें पूरी करने के सामान मासिक किराए पर देती हैं।


इस तरह का काम मुंबई, पुणे, दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव, हैदराबाद, चेन्नई, बंगलुरु समेत कई दूसरे मेट्रो शहरों में चल रहा है।


मौजूदा वक्त में रेंटिंग कंपनियां एक महीने से लेकर 24 महीने तक के प्लान दे रही हैं। ये प्लान उनके प्रोडक्ट्स के हिसाब से होते हैं और कंपनियों की वेबसाइट्स पर मिलते हैं।


टेन्योर बढ़ने के साथ मासिक किराया घटता जाता है। मिसाल के तौर पर, अगर आप रेंटमोजो.कॉम से डबल बेड किराए पर लेते हैं तो 24 महीने के लिए यह किराया 319 रुपये बैठता है, जबकि तीन महीने की अवधि के लिए इसी बेड के लिए आपको 409 रुपये महीने के हिसाब से किराया चुकाना होगा।


आपको अपना प्लान ऑनलाइन बुक करते वक्त ही न्यूनतम टेन्योर को चुनना पड़ता है।


आमतौर पर दो महीने के किराए के बराबर रकम आपको सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर जमा करानी पड़ती है। फोरक्लोजर के लिए आपको मामूली पेनाल्टी भी देनी पड़ती है।


अगर आपके अपार्टमेंट में लिफ्ट है तो कुछ कंपनियां डिलीवरी चार्ज आपसे वसूल नहीं करती हैं। ऐसा न होने पर आपको डिलीवरी चार्ज देना पड़ता है। अगर आप एयर कंडीशनर जैसे बड़े इलेक्ट्रिक सामान किराए पर लेते हैं तो इसके इंस्टॉलेशन का पैसा भी आपको चुकाना पड़ता है।


अगर आप न्यूनतम टेन्योर पूरा करने से पहले ही किसी दूसरे इलाके या शहर में शिफ्ट होते हैं तो भी आपको अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा।


फर्नीचर किराए पर लेने के लिए क्या दस्तावेज देने पड़ते हैं?


आपको किराए पर लिए जाने वाले सामानों को चुनना पड़ता है और वेरीफिकेशन के लिए मेल आईडी और फोन नंबर देना पड़ता है। इसके बाद आपको अपनी सुविधा के मुताबिक इन सामानों का इस्तेमाल करने के लिए न्यूनतम टेन्योर का चुनाव भी करना पड़ता है।


आपको नो योर कस्टमर (KYC) प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। रेंटिंग कंपनी डिफॉल्ट करने के जोखिम का आकलन करती है और कस्टमर की वैधता की जांच की जाती है।


अगर आप वर्किंग प्रोफेशनल हैं तो फर्नीचर कंपनी आपके पैन कार्ड, आपकी कंपनी के नाम, आधिकारिक मेल आईडी और फोटोग्राफ की मांग करती है।


अगर आप फ्रीलांसर हैं तो कंपनी आपके बैंक स्टेटमेंट की भी मांग कर सकती है। अगर आप स्टूडेंट हैं आपको अपना कॉलेज पहचान पत्र, कॉलेज का नाम और आपके पेरेंट्स के बैंक खाते का स्टेटमेंट और सरकार द्वारा जारी किए गए उनके पहचान पत्र को देना पड़ता है।


इतने ज्यादा निजी दस्तावेज देना क्या सुरक्षित है?


ऑनलाइन फर्नीचर रेंटिंग कंपनियों को अपने क्लाइंट्स का केवाईसी करने का अधिकार नहीं है।


पायनियर लीगल के काउंसल अनुपम शुक्ला कहते हैं, “किसी सेवा को उठाने के लिए किसी निजी इकाई के मांगे जाने वाले निजी दस्तावेजों के जरिए केवाईसी करवाने में कुछ तब तक गलत नहीं है जब तक कि आपके सामने ऐसा किए जाने का मकसद पूरी तरह से स्पष्ट न हो। आपको यह पता होना चाहिए कि इन्हें कौन स्टोर कर रहा है और ये दस्तावेज इस इकाई के पास कब तक स्टोर रहेंगे।”


स्ट्रैटेजी लॉ पार्टनर्स के मैनेजिंग पार्टनर दर्शन उपाध्याय कहते हैं, “यह जानकारी निजी संस्थानों को सशर्त दी जानी चाहिए और इसकी पुष्टि ईमेल के जरिए होनी चाहिए।”


अपनी ईमेल में आपको साफतौर पर यह बताना चाहिए कि आपकी निजी जानकारियां और दस्तावेज किसी भी थर्ड पार्टी के साथ साझा नहीं किए जाएंगे और सर्विस के खत्म होने के बाद यह जानकारी डिलीट कर दी जाएगी।


निजी संस्थानों को इस बात की पुष्टि करनी चाहिए कि आपके निजी डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। अगर आपके डेटा की चोरी होती है तो वे जिम्मेदार होंगे।


किराए पर फर्नीचर लेने में क्या हैं समस्याएं?


किराए पर फर्नीचर लेने में एक सबसे बड़ी समस्या फर्नीचर की क्वालिटी की होती है।


रुपीविज इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स की को-फाउंडर और सीओओ सपना तिवारी कहती हैं, “अक्सर इन कंपनियों का किराए के लिए दिया जाने वाला फर्नीचर बहुत बढ़िया क्वालिटी का नहीं होता है और न ही ये नए उत्पाद होते हैं।”


आपको मिलने वाला फर्नीचर पहले ही कई लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जा चुका हो सकता है।


मौजूदा कोविड-19 के दौर में यह बेहद अहम है कि आपको मिलने वाला फर्नीचर अच्छी हालत में हो, साथ ही घर पर डिलीवरी से पहले ही इसे सैनिटाइज किया जा चुका हो।


यह देख लें कि आपको डिलीवर होने वाले फर्नीचर में कोई डैमेज तो नहीं है। ऐसा होने पर आपको बाद में पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। अगर आप एक महीने के रेंट से भी डिफॉल्ट करते हैं तो इसका आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ता है।


कुबेर फाइनेंशियल सर्विसेज के फाइनेंशियल एडवाइजर रोहित पवार कहते हैं, “मासिक किराया हो सकता है कि कम हो, लेकिन आपको लेट फीस पर लगने वाली ब्याज दर पर भी विचार करना चाहिए।”


मिसाल के तौर पर, रेंटमोजो हर महीने बकाया रकम पर लेट फीस के तौर पर 10 फीसदी का शुल्क लेता है। ऐसे में अगर आपका मासिक किराया 10,000 रुपये है तो लेट फीस 1,000 रुपये होगी। लेकिन, अगर आप लगातार कई महीनों तक डिफॉल्ट करते रहेंगे तो यह लेट फीस जुड़कर बहुत बड़ी रकम बन जाएगी।


क्या मुझे किराए पर फर्नीचर लेना चाहिए या इसे खरीदना चाहिए?


फर्नीचर को रेंट पर लेना स्टूडेंट्स या मिलेनियल्स, बैचलर्स और ऐसे लोगों के लिए कारगर हो सकता है जो कि कम वक्त के लिए किसी दूसरे शहर में रहने जाते हैं। ये लोग आसानी से सामान वापस कर सकते हैं और दूसरे शहर में काम या पढ़ाई के लिए शिफ्ट हो सकते हैं।


कम बजट वाले लोगों और जो लोग नया फर्नीचर खरीदने के लिए वित्तीय रूप से सक्षम नहीं हैं उनके लिए भी किराए पर फर्नीर लेना एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।


तिवारी के मुताबिक, “फर्नीचर किराए पर लेने से पहले आपको आपको रेंट की सभी शर्तों और नियमों को ठीक तरह से पढ़ लेना चाहिए और मासिक किराए को नहीं चुका पाने की स्थिति में इसके दुष्परिणामों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए।”


साथ ही आपको यह भी जान लेना चाहिए कि आपके निजी ब्योरे का किस तरह से इस्तेमाल किया जाएगा, अगर कोई डैमेज होता है तो उसका क्या खर्च आप पर बैठेगा और रेंटल की अवधि में प्रोडक्ट का मेंटेनेंस कौन करेगा।


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