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Coronavirus के इस दौर में क्यों बढ़ी बड़े बीमा प्लान की डिमांड

भारत में अभी तक 5-7 लाख रुपए के मेडिकल इंश्योरेंस को पर्याप्त माना जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है
अपडेटेड May 22, 2020 पर 08:22  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अमित छाबड़ा


पिछले कुछ दशकों के दौरान Covid-19 महामारी और ऐसी ही अन्य कई संक्रामक बीमारियां सामने आई हैं। खुद को फिट और स्वस्थ रखने की पूरी कोशिशों के बावजूद आपके इस तरह की बीमारियों का शिकार होने की संभावना बनी रहती है। इस तरह की बीमारियां सही मायने में सभी के लिए चिंता का सबब हैं। और इनसे संक्रमित होने के बाद, तत्काल हॉस्पिटलाइजेशन कोई हैरानी की बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान दुर्घटना, संक्रामक बीमारियों और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिनके लिए अच्छी ट्रीटमेंट और देखरेख की जरूरत होती है। हममें से शायद ही ऐसा कोई होगा जिसके परिवार के सदस्यों को कम से कम एक बार अस्पताल में भर्ती न कराना पड़ा हो।


हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर लोगों की गलत धारणा


भारत में अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने की इच्छा रखने वाले लोग सभी तरह की मेडिकल संबंधी खर्चों के लिए 5 -7 लाख रुपए की बीमा राशि को बहुत ज्यादा और पर्याप्त मानते हैं। वे इतनी बीमा राशि को खुद के लिए और साथ ही अपने परिवार की आकस्मिक चिकित्सा संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त मानते हैं। इसमें किसी अनहोनी की स्थिति में तत्काल हॉस्पिटलाइजेशन का खर्च भी शामिल होता है।


इसमें कोई संदेह नहीं है, भारत में एक औसत मध्यम वर्गीय परिवार के लिए 5 - 7 लाख रुपये का सम इंश्योर्ड पर्याप्त लग सकता है क्योंकि वे भविष्य के बारे में न सोचकर सिर्फ वर्तमान परिस्थितियों के बारे में सोचते हैं। इस बात को समझने के लिए वर्तमान में जारी कोरोना संकट का उदाहरण लेते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार का प्रति व्यक्ति औसत इंश्योरेंस क्लेम लगभग 5 - 7 लाख रुपये आता है जो वरिष्ठ नागरिकों के मामले में 12 से 14 लाख रुपये तक जा सकता है। इसके साथ ही कोविड-19 के मामले में कई क्लेम की संभावना काफी अधिक है क्योंकि परिवार के एक व्यक्ति को कोविड-19 से संक्रमित हो जाने पर अन्य सदस्यों के भी संक्रमित होने की संभावना काफी अधिक होती है। ऐसे हालात में यदि कोई कई क्लेम लगाता है तो पॉलिसी में शामिल प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त कवरेज देने करने के लिए सम इंश्योर्ड कम हो सकता है।


दुर्भाग्य से, कुछ ऐसी गंभीर बीमारियां हैं जिनके इलाज के खर्च की वजह से आपके लिए वित्तीय संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। किडनी संबंधी बीमारी; भारत के किसी एक मेट्रो शहर में डायलिसिस का खर्च 2000 से 3000 रुपये के बीच कुछ भी हो सकती है। सप्ताह में दो बार डायलिसिस होने की स्थिति में यह राशि आसानी से लगभग 25,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच सकती है। कैंसर; कुल मिलाकर, 100 से अधिक प्रकार के कैंसर होते हैं और सर्जरी तथा कीमो सीजन सहित एक्सोर्बेंट कैंसर ट्रीटमेंट का खर्च अक्सर 20 लाख से ज्यादा होता है।


मेडिकल पर बढ़ते खर्च और उसका प्रभाव


जहां एक तरफ देश में हेल्थकेयर और मेडिकल ट्रीटमेंट के क्षेत्र में बहुत तेजी से सुधार हो रहा है और अधिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मेडिकल ट्रीटमेंट और खासकर सटीक और गुणवत्तापूर्ण मेडिकल ट्रीटमेंट के खर्च में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है। भारत में मेडिकल महंगाई दर को लेकर मर्कर मार्श बेनिफिट्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार - भारत में मेडिकल ट्रेंड रेट यानी मेडिकल इन्फ्लेशन की वजह से प्रति व्यक्ति चिकित्सा खर्च दोगुना तक बढ़ने की संभावना है। सरल शब्दों में कहें तो मेडिकल ट्रेंड रेट के लगभग 10 - 12 प्रतिशत रहने की संभावना है जबकि वर्तमान में महंगाई दर लगभग 5 - 6 प्रतिशत है। कई अध्ययनों से यह भी पता चला है कि महंगे चिकित्सा खर्च की वजह से भारत में हर साल हजारों लोगों को गरीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं। इसके अलावा बड़े अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों की वजह से सिर्फ गरीब ही नहीं बल्कि मध्यम वर्ग भी बुरी तरह प्रभावित होता है और उसे जीवन के अन्य लक्ष्यों के साथ समझौता करना पड़ता है।


क्या है हल?


खुशकिस्मती से, विभिन्न अप्रत्याशित हेल्थ इमरजेंसी वाली स्थितियों से निपटने के लिए बाजार में हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध है। ये हेल्थ पॉलिसियां आमतौर पर न सिर्फ हॉस्पिटलाइजेशन, प्रोसीजर और मेडिकल केयर बल्कि हॉस्पिटलाइजेशन से पहले और बाद के चिकित्सा खर्चों को भी कवर करती हैं। जिसमें इस अवधि के दौरान होने वाले चिकित्सीय परीक्षण और दवाओं का खर्च भी शामिल होता है। हालांकि, सिर्फ कोई भी एक स्वास्थ्य बीमा खरीदने से उद्देश्य हल नहीं होगा। हेल्थ इंश्योरेंस प्लान खरीदते समय, पर्याप्त सम इंश्योर्ड के साथ पर्याप्त बीमा होना बहुत जरूरी है।


इंश्योरेंस मार्केट ट्रेंड्स के अनुसार, 1 करोड़ रुपये सम इंश्योर्ड का हेल्थ प्लान लेने वाले लोगों की संख्या में बहुत इजाफा हुआ है। पिछले 2 महीनों में ऑनलाइन बेची गई सभी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में से लगभग 30 प्रतिशत 1 करोड़ सम एश्योर्ड वाली हैं। बेहद सस्ता होना इस तरह के प्लान लेने वाले लोगों की संख्या में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की एक अहम वजह है। ये प्लांस बहुत सस्ती कीमतों पर उपलब्ध हैं। फैमिली फ्लोटर प्लान लेने वाले पॉलिसीधारकों के लिए ज्यादा सम इंश्योर्ड लेना बेहद अहम हो जाता है क्योंकि आपका परिवार आपके हेल्थ इंश्योरेंस के सम इंश्योर्ड को साझा करता है। ऐसे में एक ही वर्ष में कई क्लेम के मामलों में, कम सम इंश्योर्ड आपकी जरूरतों के लिए कम पड़ जाएगा।


इन बातों के मद्देनजर आप 1 करोड़ रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकते हैं जो बेस प्लान और सुपर टॉप-अप पॉलिसी के कॉम्बिनेशन के रूप में आती है। इस प्लान के तहत, बीमा कंपनी हॉस्पिटलाइजेशन खर्च के लिए 1 करोड़ रुपये तक के टोटल सम इंश्योर्ड का भुगतान करती है। हेल्थ इंश्योरेंस में इन-बिल्ट ऑप्शन चुनने का ये मतलब है कि यह प्लान सिर्फ एक बेसिक हेल्थ प्लान नहीं है, बल्कि एक बेस हेल्थ प्लान और सुपर टॉप-अप पॉलिसी का कॉम्बिनेशन है। जिसमें कुल 1 करोड़ रुपये का सम इंश्योर्ड है। बीमा राशि को बढ़ाने के लिए ग्राहक को अतिरिक्त टॉप-अप प्लान का विकल्प नहीं चुनना पड़ता है। इस तरह के प्लान कम कीमत पर उच्च सम इंश्योर्ड की पेशकश करते हैं, क्योंकि इसमें बेस हेल्थ प्लान के साथ सुपर टॉप-अप प्लान की अतिरिक्त विशेषता है।


बाजार में क्या हैं विकल्प?


वर्तमान में दो प्रमुख बीमा कंपनियां मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस और आदित्य बिड़ला कैपिटल, बेस प्लान और सुपर टॉप-अप प्लान के कॉम्बिनेशन के साथ 1 करोड़ के सम इंश्योर्ड हेल्थ प्लान की पेशकश कर रही हैं। मैक्स बूपा हेल्थ इंश्योरेंस का 1 करोड़ रुपये का हेल्थ प्लान 5 लाख + 95 लाख- हेल्थ रिचार्ज का एक कॉम्बिनेशन है, जबकि आदित्य बिड़ला कैपिटल का 1 करोड़ सम इंश्योर्ड भी 5 लाख +95 लाख का कॉम्बिनेशन है। मेट्रो शहर में रहने वाला 32 वर्षीय कोई व्यक्ति आदित्य बिड़ला प्लान को 9552 रुपये में खरीद सकता है। जबकि मैक्स बूपा के 1 करोड़ रुपये के प्लान के लिए उसे 10992 रुपये खर्च करने होंगे।


लेखक पॉलिसीबाजार के हेल्थ इंश्योरेंस के हेड हैं।


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