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by Roopali Sharma | mar 242026

एवरग्रीन भारतीय 10 ट्रेंडी साड़ियां, जो कभी फैशन से बाहर नहीं होतीं

वाराणसी की यह साड़ी अपनी भारी जरी और बारीक बुनाई के लिए वर्ल्ड फेमस है। यह सोने और चांदी के धागों की कढ़ाई के लिए जानी जाती है

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बनारसी साड़ी (उत्तर प्रदेश)

दक्षिण भारत की “साड़ियों की रानी” कही जाने वाली कांजीवरम अपने चमकदार रेशम और चौड़े कंट्रास्ट बोर्डर के लिए पहचानी जाती है

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कांजीवरम साड़ी (तमिलनाडु)

पैठानी साड़ी की विशेषता मोर और कमल के डिज़ाइन वाला पल्लू है। यह रेशम से बनी होती है और चटकीले रंगों के लिए जानी जाती है

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पैठानी साड़ी (महाराष्ट्र)

यह साड़ी टाई-एंड-डाई तकनीक से तैयार की जाती है, इससे कपड़े पर खूबसूरत डोट्स और पैटर्न बनते हैं, जो इसे आरामदायक बनाते हैं

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बंधनी साड़ी(गुजरात और राजस्थान

अपनी हल्के लुक के लिए मशहूर चंदेरी साड़ी रेशम और सूती धागों से बनाई जाती है। इसमें जरी के बारीक बोर्डर का काम होता है

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चंदेरी साड़ी (मध्य प्रदेश)

यह डबल इकत बुनाई की कला है, जिसमें धागों को बुनने से पहले ही रंगा जाता है। इसके चटकीले रंग इसे बेहद कीमती और विशिष्ट बनाते हैं

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पटोला साड़ी (गुजरात)

केरल की यह पारंपरिक साड़ी सादगी के लिए जानी जाती है। यह सफ़ेद पर सुनहरे रंग के बोर्डर के साथ आती है, जो शालीन लुक देता है

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कसवु साड़ी (केरल)

असम का मुगा रेशम दुनिया के सबसे दुर्लभ रेशमों में से एक है, जो अपने सुनहरे रंग और टिकाऊपन के लिए जाना जाता है

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मुगा सिल्क साड़ी (असम)

गर्मियों के लिए उपयुक्त, तांत साड़ी बारीक सूती धागों से बुनी जाती है। यह सुंदर पारंपरिक डिजाइनों के लिए बंगाल में पहनी जाती है

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तांत साड़ी (पश्चिम बंगाल)

यह अपनी इकत बुनाई और शंख, चक्र मोटिफ्स के लिए पोपुलर है। संबलपुरी साड़ियों में धागों को बांधकर रंगने की कला होती है

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संबलपुरी साड़ी (ओडिशा)

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