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by Roopali Sharma | mar 242026

रेत के बीच सफेद जादू है तेल अवीव के मॉडर्न इजरायल की कहानी

इज़रायल के शहर तेल अवीव को इसकी अनूठी वास्तुकला और इतिहास के कारण ‘व्हाइट सिटी’ कहा जाता है, इज़रायल की घोषित राजधानी जेरूसलम है, लेकिन तेल अवीव देश का केंद्र है, आइये जानते है यहां इसे को ‘व्हाइट सिटी’ क्यों कहा जाता हैं:

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तेल अवीव में 4,000 से ज्यादा बोहोस स्टाइल की बिल्डिंग हैं, जो इसे दुनिया में इस तरह की आर्किटेक्टर का सबसे बड़ा कलेक्शन बनाती हैं

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दुनिया का सबसे बड़ा कलेक्शन

1930 के दशक में, नाजी शासन से बचकर कई यहूदी वास्तुकार जर्मनी से भागकर यहां आए थे। वे अपने साथ मोडर्न ‘बोहोस‘ स्टाइल लेकर आए

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जर्मन आर्किटेक्टर का इफेक्ट

इमारतों को सफेद या हल्के रंग में इसलिए रंगा गया था ताकि वे तेज़ धूप को रिफ्लेक्ट कर सकें और मध्य पूर्व की भीषण गर्मी में अंदर से ठंडी रहें

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गर्मी से बचने के लिए सफेद रंग

हवा के वेंटिलेशन बनाने के लिए इमारतों में संकरी बालकनियां बनाई गईं, समुद्र से आने वाली ठंडी हवा का आनंद लिया जा सके

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बालकनी और खुली हवा

आर्किटेक्टर और ऐतिहासिक महत्व के कारण, UNESCO ने 2003 में तेल अवीव के ‘व्हाइट सिटी’ क्षेत्र को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया

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यूनेस्को रिकग्निशन

यहां की इमारतों की छतें सपाट होती हैं, जिनका उपयोग शाम के समय लोग सोशल मेलजोल और ताजी हवा के लिए करते हैं

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फ्लैट रूफ्स

यूरोपीय बोहोस स्टाइल में बड़ी कांच की खिड़कियां होती थीं, लेकिन यहां गर्मी कम करने के लिए छोटी और गहरी खिड़कियां बनाई गईं

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लोकल क्लाइमेट से चेंज

इस स्टाइल में डेकोरेशन के बजाय ‘फंक्शनलिटी’ पर ज़ोर दिया गया है। इमारतों की बनावट में ज्योमेट्रिक शेप का यूज किया गया है

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सिम्पलिसिटी और फंक्शनलिटी

शहर 1948 से 1950 तक इज़रायल की शुरुआती राजधानी भी रहा था, जिस दौरान इन इमारतों ने शहर को मोडर्न और ग्लोबल पहचान दी

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ऐतिहासिक संदर्भ

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