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by Roopali Sharma | jun  102026

टाइप 2 डायबिटीज में इंटरमिटेंट फास्टिंग कंट्रोल होगी या बढ़ेगा रिस्क!

टाइप 2 डायबिटीज़ (T2DM) को कंट्रोल करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने के लिए भारत में इंटरमिटेंट फ़ास्टिंग (IF) का ट्रेंड तेज़ी से बढ़ा है, आइये जानते है इसके बारे में:

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फ़ास्टिंग शुरू करने से पहले डाक्टर से सलाह लें। वे हाइपोग्लाइसीमिया से बचाने के लिए मेडिसिन की खुराक प्रिवेंट कर सकते हैं

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डाक्टर से कंसल्ट

इसके लिए शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक फास्टिंग रखें। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे के बीच भोजन करें

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16:8 फ़ास्टिंग शेड्यूल

एकदम से फास्टिंग करने से पहले 12:12 से शुरू करें और धीरे-धीरे बढ़ाएं। फिर 14:10 और अंत में 16:8 प्रोटोकोल अपनाएं

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धीरे-धीरे शुरुआत करें

भोजन में मल्टीग्रेन रोटी, दाल, पनीर और सब्जियां शामिल करें। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फाइबर का बैलेंस बनाए रखें

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बैलेंस डाइट लें

फास्टिंग के दौरान भरपूर मात्रा में पर्याप्त पानी पिएं। ग्रीन टी, हर्बल टी या ब्लैक कोफी बिना चीनी ले सकते हैं

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हाइड्रेटेड रहें

शुरुआती हफ्तों में दिन में 3–4 बार शुगर जांचें। इससे फ़ास्टिंग के एफेक्ट और सेफ्टी पर नज़र रखी जा सकती है

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ब्लड शुगर मोनिटर करें

नाश्ते में मूंग दाल चीला, दलिया, दही और मेथी परांठा बेहतर ओप्शन होते हैं। ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं

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लो-GI भोजन चुनें

शुगर 70 mg/dL से कम या 300 mg/dL से ज्यादा हो तो फ़ास्टिंग तोड़ दें। चक्कर, पसीना या हाथ कांपने पर तुरंत ग्लूकोज लें

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रेड फ्लैग्स पहचानें

कभी भी समोसा, कचौरी, मिठाई और कोल्ड ड्रिंक न लें। ये ब्लड शुगर बढ़ाकर फ़ास्टिंग के लाभ कम कर देते हैं

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जंक फूड से बचें

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