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क्यों हमारे पूर्वज कह गए खाना चाहिए खिचड़ी संक्रात पर?

by Roopali Sharma | JAN 13, 2025

पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति 14 जनवरी को है.  हर साल मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है

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इस पर्व को नई ऋतु और नई फसल का भी संकेत माना जाता है. मकर संक्रांति के दिन को देवी-देवताओं का माना जाता है. इस बात का उल्लेख पुराणों में देखने  को मिलता है

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वहीं, इस मौके खिचड़ी खाने की परंपरा काफी लंबे समय से चली आ रही है, जिसका पालन लोग आज भी करते हैं. तो आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण के बारे में

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एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भारत पर खिलजी का आक्रमण हुआ था, तब युद्ध के कारण लोग ठीक से खाना नहीं खा पा रहे थे. तब गुरु गोरखनाथ ने एक उपाय बताया

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युद्ध खत्म होने पर गुरु गोरखनाथ और उनके साथियों ने मकर संक्रांति के दिन यह खिचड़ी बनाई, इसे बांटा और इसका नाम खिचड़ी रखा. तब से मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा बन गई

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मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की परंपरा है.  खिचड़ी बेहद ही पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन है. इसका संबंध सूर्य और शनि से भी माना जाता है

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मकर संक्रांति पर दान का भी खास महत्व है. इस दिन खिचड़ी का दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है. दान से व्यक्ति को पुण्य मिलता है

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मकर संक्रांति के दिन दान करने से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है. इसलिए इस दिन तिल का दान करने से सूर्य देव और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है

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इसके अलावा गरीब लोगों को गर्म वस्त्र का दान करें.  इससे धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है

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