तुर्किए के बोस्फोरस स्ट्रेट (Bosphorus strait) के पास रूस के शैडो फ्लीट के दो टैंकरों में शुक्रवार (28 नवंबर 2025) देर रात धमाके हुए, जिसके बाद वो जल गए। रूस के इन दोनों शैडो फ्लीट टैंकर का नाम Kairos और Virat है। CNN ने यूक्रेनी सुरक्षा एजेंसी (SBU) के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि यह हमला रूस की तथाकथित शैडो फ्लीट पर किया गया और यूक्रेन ने इसकी जिम्मेदारी भी स्वीकार कर ली है। ब्लैक सी में हुए इस धमाके को लेकर तुर्किए ने मिसाइल, ड्रोन या किसी समुद्री वाहन से बाहरी हमला होने की आशंका जताई है।
हमले के बाद टैंकर के क्रू ने खुले रेडियो चैनल पर मदद के लिए कॉल की। उन्होंने संदेश में कहा कि उन पर “ड्रोन अटैक” हुआ है, हालांकि वास्तव में यह एक समुद्री अनमैन्ड ड्रोन था। रेडियो कॉल के वीडियो में एक क्रू सदस्य को घबराते हुए यह कहते सुना गया, “यह विराट है… हमें मदद चाहिए! ड्रोन हमला! मेडे!”
"This is VIRAT. Help needed! Drone attack! Mayday!"
The crew of the tanker VIRAT reported a drone attack on an open frequency. Clearly, they weren't referring to regular drones, but to unmanned boats. As a reminder, the tankers VIRAT and KAIROS were "exposed to external… pic.twitter.com/cQ7oXvljZ7 — Victor vicktop55 commentary (@vick55top) November 28, 2025
X पर जारी एक बयान में तुर्की के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि रूसी टैंकर ‘विराट’ पर फिर से बिना चालक वाले समुद्री ड्रोन से हमला किया गया। मंत्रालय के अनुसार, टैंकर पर इससे पहले भी ब्लैक सी तट से करीब 35 नॉटिकल मील दूर ऐसे ही ड्रोन ने वार किया था, और शनिवार सुबह दोबारा हमला हुआ। तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोलू ने कहा कि जांच टीमें जहाज़ को हुए नुकसान का कारण पता लगाने में जुटी हैं। उन्होंने बताया, “बाहरी हमले का मतलब कई तरह की संभावनाएं हो सकती हैं—जैसे कोई माइन, रॉकेट, प्रोजेक्टाइल, या फिर कोई ड्रोन अथवा पानी के भीतर चलने वाला अनमैन्ड व्हीकल। शुरुआती जांच में ये सबसे संभावित कारण नजर आते हैं।”
हमले से जहाज़ को हल्का नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन ‘विराट’ अभी भी स्थिर बताया जा रहा है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और किसी को भी गंभीर चोट नहीं आई है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस पर नजर रखने वाले X अकाउंट OSINTdefender ने तुर्की परिवहन मंत्रालय के हवाले से बताया कि गैम्बिया के झंडे वाला यह टैंकर, जो कथित तौर पर “रूसी शैडो फ्लीट” का हिस्सा है, दक्षिणी ब्लैक सी में एक बार फिर अनमैन्ड सरफेस ड्रोन से टकराया। शुक्रवार को हुए पहले हमले के बाद 20 क्रू मेंबर को जहाज़ से बाहर निकाल लिया गया था। ताज़ा जानकारी के अनुसार, जहाज अब तुर्की के तट के पास आग पकड़ चुका है और धीरे-धीरे डूबने की स्थिति में है।
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि इस हमले में SBU और नेवी ने मिलकर काम किया, और इसके लिए “सी बेबी” नाम के समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। रूस की ओर से इस घटना पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। सूत्रों का कहना है कि ड्रोन हमले के बाद दोनों रूसी टैंकरों को भारी नुकसान पहुंचा है और वे अब लगभग उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। उनके मुताबिक, “इस हमले से रूसी तेल ढोने वाली सप्लाई लाइन को बड़ा धक्का लगेगा।” रूस अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के बावजूद कच्चे तेल को निर्यात करने के लिए बड़ी संख्या में टैंकरों पर निर्भर है, जिनमें से कई अलग-अलग देशों के “फ़्लैग ऑफ कंवीनियंस” के तहत रजिस्टर्ड हैं।
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