सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, इस्तेमाल न होने वाली गाड़ियों पर नहीं लगेगा रोड टैक्स

सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 1 सितंबर, 2025 को गाड़ियों पर लग रहे रोड टैक्स को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिसमें कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि रोड टैक्स केवल उन्हीं वाहनों पर लगेगा, जो पब्लिक प्लेस यानी सार्वजिनक सड़को पर उपयोग किए जा रहे हैं या उपयोग के लिए खड़े हैं।

अपडेटेड Sep 01, 2025 पर 2:00 PM
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, इस्तेमाल न होने वाली गाड़ियों पर नहीं लगेगा रोड टैक्स

सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 1 सितंबर, 2025 को गाड़ियों पर लग रहे रोड टैक्स को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिसमें कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि रोड टैक्स केवल उन्हीं वाहनों पर लगेगा, जो पब्लिक प्लेस यानी सार्वजिनक सड़को पर उपयोग किए जा रहे हैं या उपयोग के लिए खड़े हैं। इसका सीधा-सीधा मतलब यह है कि अगर आपकी गाड़ी घर के गैराज में, फैक्ट्री के अंदर या किसी प्राइवेट परिसर में खड़ी है और पब्लिक रोड पर इस्तेमाल नहीं हो रही है, तो उस पर सरकार रोड टैक्स नहीं वसूल सकती।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय ऐसे समय में आया जब गाड़ियों पर मनमाने तरीके से टैक्स लगाया जा रहा था। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि मोटर वाहन टैक्स क्षतिपूर्ति के रूप में होता है, यानी यह टैक्स सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे सड़कों और राजमार्गों के उपयोग के बदले लिया जाता है। अगर कोई वाहन सार्वजनिक स्थान पर इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो वह इन बुनियादी ढांचों से कोई लाभ नहीं ले रहा है, इसलिए उस पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए।

किस मामले से जुड़ा है यह फैसला?


यह मामला आंध्र प्रदेश से जुड़ा हुआ है। विशाखापत्तनम स्टील प्लांट (RINL) के भीतर लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान करने वाली एक कंपनी ने अपनी 36 गाड़ियों का संचालन सिर्फ प्लांट परिसर तक सीमित रखा। ये वाहन सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलते थे, बल्कि केवल फैक्ट्री यार्ड के अंदर ही इस्तेमाल किए जाते थे, जो CISF की सुरक्षा में पूरी तरह से एक प्रतिबंधित क्षेत्र है।

कंपनी ने राज्य सरकार से रोड टैक्स छूट मांगी, लेकिन विवाद बढ़ते-बढ़ते सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि चूंकि यह जगह ‘पब्लिक प्लेस’ नहीं है, इसलिए गाड़ियों पर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता।

कितना बड़ा असर होगा?

हर साल लाखों गाड़ियां महीनों तक गैराज में खड़ी रहती हैं, जिसमें टैक्सी, बस, ट्रक यहां तक कि पर्सनल कार भी शामिल हो सकती हैं। अभी तक मालिकों को इनपर भी रोड टैक्स देना होता था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद से अगर गाड़ियां नॉन- ऑपरेशनल रखी जाती हैं, तो मालिक टैक्स से छूट ले सकते हैं। मतलब अगर आपने अपनी कार 6 महीने तक नहीं चलाई, तो अब आपको उन 6 महीनों का टैक्स नहीं देना होगा!

क्या सभी लोग तुरंत फायदा उठा पाएंगे?

फिलहाल, अभी यह फैसला आंध्र प्रदेश मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट (1963) पर हुआ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर देशभर के समान प्रावधानों पर पड़ सकता है। यानी अब अन्य राज्यों के वाहन मालिक भी इसी आधार पर टैक्स छूट की मांग कर सकते हैं।

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