Get App

Nana Patekar News: जानें क्यों सूर्यास्त के बाद नाना पाटेकर को दी गई मुखाग्नि, बेटे मल्हार ने बताई पूरी बात

Nana Patekar News: नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर को सुबह 5:30 बजे हो गया था। वहीं देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। हिंदू मान्यता के मुताबिक सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। वहीं अब दिवंगत एक्टर के बेटे ने बताया कि आखिर ऐसा क्यों किया गया।

Manushri Bajpaiअपडेटेड Oct 09, 2026 पर 11:43 AM
Nana Patekar News: जानें क्यों सूर्यास्त के बाद नाना पाटेकर को दी गई मुखाग्नि, बेटे मल्हार ने बताई पूरी बात
नाना पाटेकर का गोवा में 75 साल की उम्र में निधन हो गया। एक्टर को कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक CPR और रिससिटेशन की कोशिश की। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

Nana Patekar News: दिवंगत एक्टर नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने बताया कि एक्टर का अंतिम संस्कार सूर्यास्त के बाद क्यों किया गया। परंपरा के अनुसार सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है। अंतिम संस्कार के बाद मल्हार पाटेकर ने मीडिया से बात की और बताया कि परिवार और उनका पार्थिव शरीर गोवा में था। लंबी यात्रा के कारण उन्हें उनके फार्महाउस तक लाने में कुछ समय लग गया।

उन्होंने यह भी बताया कि एक्टर का निधन सुबह जल्दी हो गया था और काफी समय बीत चुका था। इसलिए पार्थिव शरीर को लंबे समय तक रखना ठीक नहीं था। गुरुवार को पुणे जिले के डोंजे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ एक्टर का अंतिम संस्कार किया गया। एक्टर को 3-गन सैल्यूट दिया गया।

उन्होंने दिवंगत एक्टर की समाज सेवा की विरासत को आगे बढ़ाने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा- "उनके जैसे लोग कहीं नहीं जाते। वे अपने कामों के जरिए हमेशा जीवित रहते हैं और अमर हो जाते हैं। वे हमेशा हमसे एक बात कहते थे कि हमें मानवता के लिए एकजुट होना चाहिए और दुनिया की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। हमारा समाज सेवा का काम महाराष्ट्र और पूरे भारत (जम्मू-कश्मीर सहित) में फैला हुआ है। हम शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में वहां अपना सारा समाज सेवा का काम कर रहे हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "उन्होंने उन सभी लोगों को जिम्मेदारियां सौंप दी थीं, जो इसके हकदार थे। उन्होंने बहुत सारा काम उन लोगों को सौंप दिया था जो उसे बखूबी निभा सकते थे।" वह सब कुछ नए सिरे से शुरू करना चाहते थे और अपनी जिंदगी ऐसी जगह बिताना चाहते थे जहां उनसे समाज सेवा की उम्मीद हो। मैं पक्का करूंगा कि जो भी काम अधूरे रह गए हैं वे पूरे हों। लोगों के लिए काम करना उनके और मेरे दोनों के सपने हैं।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें