360kmph रफ्तार से चलने वाली हाई स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट में भारत के हामेंद्र का जलवा, जानिए इस 21 साल के युवा की कहानी

फ्रैंकफर्ट की यह कंपनी हाई-स्पीड और ड्राइवरलेस ट्रेनों के साथ रेलवे के कोच, स्पेयर पार्ट्स और सिग्नलिंग सिस्टम तैयार कर रही है। हामेंद्र ने जर्मनी को मैन्युफैक्चरिंग सेंटर चुना और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के जरिए रेलवे सेक्टर में नई संभावनाएं तलाश रहे हैं।

अपडेटेड Oct 01, 2026 पर 12:16 PM
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21 साल की उम्र में जर्मनी में कंपनी की कमान, हाई-स्पीड और ड्राइवरलेस ट्रेन बना रहे हेमेंद्र

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले के रहने वाले 21 साल के हामेंद्र कुमार ने जर्मनी में अपनी रेलवे टेक्नोलॉजी कंपनी शुरू की है। फ्रैंकफर्ट में स्थित उनकी कंपनी ट्रेन और रेलवे से जुड़ी अलग-अलग टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट पर काम कर रही है। इतनी कम उम्र में कंपनी शुरू करने के कारण हामेंद्र चर्चा में हैं।

रेलवे टेक्नोलॉजी में ऐसे बना रहे अपनी नई पहचान

हामेंद्र कुमार की कंपनी ट्रेन, रेलवे कोच, स्पेयर पार्ट्स और सिग्नलिंग सिस्टम बनाती है। कंपनी 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हाई-स्पीड ट्रेनों के साथ बिना ड्राइवर चलने वाली ट्रेनों पर भी काम कर रही है। उन्होंने जर्मनी को कंपनी का प्राइमरी मैन्युफैक्चरिंग सेंटर बनाया। क्योंकि वहां अच्छी क्वालिटी के ऑटो पार्ट्स कम कीमत में मिल जाते हैं।


विदेशों तक पहुंच रही हामेंद्र की कंपनी की ट्रेनें

कंपनी जर्मनी की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ मिलकर ट्रेनें तैयार कराती है और फिर उन्हें अलग-अलग देशों में भेजती है। अभी दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन के एक रेलवे प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया में भी कंपनी रेलवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

हामेंद्र को रेलवे डिजाइन का करीब दो साल का एक्सपीरियंस है। उन्होंने 11 महीने पहले जर्मनी में कंपनी शुरू की और चार महीने पहले ट्रेन बनाना शुरू किया। कडप्पा से जर्मनी तक पहुंचकर हामेंद्र ने कम उम्र में ही रेलवे टेक्नोलॉजी के सेक्टर में काम शुरू कर दिया है।

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