आधार कार्ड नहीं, अब बायोमेट्रिक और वोटर आईडी से मिलेगा सरकारी योजनाओं का पैसा! जानिए क्या-क्या बदल जाएगा
Aadhaar-Based Payments: केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भुगतान करने के लिए अब आधार कार्ड के बजाय बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और वोटर आईडी (EPIC) नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि आधार कार्ड आसानी से बन जाने के कारण इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं
Aadhaar-Based Payments: अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नई व्यवस्था किन योजनाओं में लागू होगी और इसे कब से शुरू किया जाएगा
Change in rules of Aadhaar-Based Payments: सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों के लिए आने वाले समय में भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। अब तक कई सरकारी योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और उनके बैंक खातों में पैसे भेजने के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने संकेत दिया है कि भविष्य में आधार कार्ड के बजाय बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (Biometric authentication) और वोटर आईडी (EPIC) नंबर को भुगतान का आधार बनाया जा सकता है। मंत्री के इस बयान के बाद सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह व्यवस्था किन योजनाओं में लागू होगी और क्या इसे सभी मंत्रालयों की योजनाओं में अपनाया जाएगा। फिलहाल मंत्री का बयान प्रस्तावित बदलाव की ओर संकेत करता है, इसे लागू हो चुका सरकारी आदेश नहीं माना जाना चाहिए।
आधार कार्ड को बदलने की बताई वजह
राष्ट्रीय जन योजना अभियान 2026-27 की कार्यशाला को संबोधित करते हुए ललन सिंह ने आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब आधार कार्ड बनवाने वाले केंद्र लगभग हर गली और इलाके में उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी का भी आधार कार्ड कुछ ही मिनटों में बनवाया जा सकता है।
मंत्री ने इसी आधार पर कहा कि केवल आधार कार्ड को लाभार्थियों की पहचान और भुगतान का प्रमुख आधार बनाए रखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और वोटर आईडी के EPIC नंबर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि आने वाले समय में सरकारी योजनाओं के भुगतान की प्रक्रिया इसी व्यवस्था के आधार पर आगे बढ़ सकती है।
क्या है EPIC नंबर और कैसे होगा इसका इस्तेमाल?
EPIC का पूरा नाम Electors Photo Identity Card है। यह चुनाव आयोग की ओर से जारी किया जाने वाला मतदाता पहचान पत्र होता है। प्रत्येक वोटर आईडी कार्ड पर एक विशिष्ट EPIC नंबर दर्ज होता है, जिसके जरिए वोटर्स की पहचान की जाती है। प्रस्तावित व्यवस्था में लाभार्थियों को अपनी पहचान साबित करने के लिए दो स्तरों पर सत्यापन कराना पड़ सकता है:-
बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन: लाभार्थी की पहचान उसके फिंगरप्रिंट या अन्य निर्धारित बायोमेट्रिक जानकारी से सत्यापित की जाएगी।
वोटर आईडी (EPIC) नंबर: लाभार्थी के मतदाता पहचान पत्र पर दर्ज विशिष्ट नंबर का इस्तेमाल पहचान के लिए किया जाएगा।
भुगतान प्रक्रिया: मंत्री के बयान के मुताबिक, इन दोनों माध्यमों से पहचान सुनिश्चित करने के बाद लाभार्थियों को भुगतान किया जाएगा। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया का तकनीकी ढांचा अभी सामने नहीं आया है।
इन सरकारी योजनाओं पर पड़ सकता है असर
आधार आधारित भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं में किया जाता है। इनमें किसानों, ग्रामीण परिवारों, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाएं भी शामिल हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसके तहत सीधे किसी व्यक्ति के बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर किया जाता हो। हालांकि, ललन सिंह के पास मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का भी प्रभार है। इस मंत्रालय की कुछ योजनाओं में आधार अनिवार्य है।
कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:-
1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): इस योजना के तहत पात्र किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों को पक्का मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता मिलती है।
3. राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP): इसके तहत बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को पेंशन दी जाती है।
4. ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम VB-G RAM G: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़ी यह योजना भी आधार से जुड़े भुगतान तंत्र का इस्तेमाल करती है।
5. राष्ट्रीय पशुधन मिशन: पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली इस योजना में भी आधार से जुड़ी पहचान की आवश्यकता होती है।
अभी किन बातों पर स्थिति स्पष्ट नहीं?
केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई व्यवस्था किन सरकारी योजनाओं में लागू होगी। फिलहाल इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी नहीं किए गए हैं।
अभी इन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं:-
क्या आधार आधारित भुगतान व्यवस्था पूरी तरह बंद होगी?
क्या सभी केंद्रीय मंत्रालयों की योजनाओं में वोटर आईडी अनिवार्य होगी?
क्या राज्य सरकारों की योजनाओं में भी यही व्यवस्था लागू की जाएगी?
जिन लाभार्थियों के पास वोटर आईडी नहीं है, उनका क्या होगा?
बायोमेट्रिक सत्यापन और EPIC नंबर को बैंक खातों से जोड़ने की प्रक्रिया क्या होगी?
इन सवालों पर सरकार की ओर से विस्तृत जानकारी आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
लाभार्थियों के लिए क्या है जरूरी?
फिलहाल, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों को घबराने या अपने आधार कार्ड में किसी तरह का बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने नई व्यवस्था को लेकर संकेत जरूर दिया है। लेकिन इसे लागू करने के लिए अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रक्रिया सामने नहीं आई है। जब तक संबंधित मंत्रालयों की ओर से औपचारिक आदेश और दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, तब तक मौजूदा योजनाओं के नियमों के अनुसार ही लाभार्थियों की पहचान और भुगतान की प्रक्रिया जारी रहेगी।