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'बच्चों सहित सभी के लिए इंटरनेट तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Internet Rights: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना और उस तक पहुंच रखना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को भी यह अधिकार हासिल है। उन्हें पूरी तरह से इंटरनेट इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Oct 17, 2026 पर 1:03 PM
'बच्चों सहित सभी के लिए इंटरनेट तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
'बच्चों सहित सभी के लिए इंटरनेट तक पहुंच एक मौलिक अधिकार है', सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Internet Rights: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना और उस तक पहुंच रखना संविधान के अनुच्छेद 21 और 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों को भी यह अधिकार हासिल है। उन्हें पूरी तरह से इंटरनेट इस्तेमाल करने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट के उपयोग से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि उनमें ऐसी कोई विवेक-बुद्धि नहीं है जिसकी रक्षा की जानी चाहिए, या उनके पास अभिव्यक्ति की ऐसी कोई स्वतंत्रता नहीं है जिसे वे व्यक्त कर सकें।

पीठ ने कहा, "हमारे बच्चों की सुरक्षा और उनकी आजादी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। हमारे बच्चे इन दोनों के ही हकदार हैं।"

सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी तब आई, जब कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) का पता लगाने और उसे हटाने की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।

इंटरनेट तक पहुंच और बच्चों की सुरक्षा, दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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