5 पीढ़ियों से रावण के पुतले बना रहा है यह मुस्लिम परिवार, अजमेर की इस साझी विरासत की कहानी खूबसूरत है

अजमेर में दशहरे के लिए 65 फीट ऊंचा रावण और 45 फीट के कुंभकर्ण-मेघनाद के पुतले तैयार हो रहे हैं। खास बात ये है कि इन्हें पिछले 5 पीढ़ियों से एक मुस्लिम परिवार बना रहा है। 15 कारीगरों की टीम एक महीने से बांस और कागज से इन पुतलों को आकार दे रही है, जो गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है।

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 8:19 AM
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रावण के पुतले बना रहा है यह मुस्लिम परिवार

अजमेर: दशहरे पर जब पूरे देश में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलेंगे, तब राजस्थान के अजमेर में जलने वाले पुतलों की कहानी सबसे अलग होगी। सिर्फ उनकी ऊंचाई की वजह से नहीं, बल्कि उन्हें बनाने वाले हाथों की वजह से।अजमेर में एक मुस्लिम परिवार पिछले 5 पीढ़ियों से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है। ये परिवार हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार बुराई पर अच्छाई की जीत के इस प्रतीक को अपने हुनर से जिंदा रखे हुए है

65 फीट का रावण, 1 महीने की मेहनत 

इस साल परिवार दशहरे के लिए 65 फीट ऊंचा रावण और 45-45 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बना रहा है।इस काम में 15 कारीगरों की टीम पिछले करीब एक महीने से दिन-रात लगी हुई है। बांस, कागज और रंगों से इन विशाल पुतलों को आकार दिया जा रहा है। परिवार के मुखिया के मुताबिक, ये हुनर उनके दादाओं ने सिखाया था और आज भी उसी परंपरा को निभाया जा रहा है।


सिर्फ बिजनेस नहीं, गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

भले ही ये परिवार के लिए रोजगार का जरिया है, लेकिन इससे बड़ी बात ये है कि ये भारत की साझा संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण है।एक मुस्लिम परिवार द्वारा रामलीला और दशहरे के सबसे अहम पुतलों को बनाना, ये दिखाता है कि त्योहार मजहब नहीं देखता। जब अजमेर में इन पुतलों का दहन होगा, तो वो सिर्फ रावण का दहन नहीं होगा, बल्कि नफरत पर मोहब्बत की जीत का भी जश्न होगा।

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