हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! धर्म नहीं परंपरा तय करेगी आदिवासी पहचान, ST दर्जा होगा खत्म

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ धर्म बदलने से ST दर्जा अपने आप खत्म नहीं होता। लेकिन संबंधित मामले में महिला जमीन खरीदने के समय अपनी जनजातीय पहचान और समुदाय से जुड़ाव साबित नहीं कर सकी, जिसके चलते कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

अपडेटेड Sep 24, 2026 पर 10:18 AM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म बदलने से ST दर्जा अपने आप खत्म नहीं होता है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे को लेकर अहम बात कही है। कोर्ट ने कहा कि केवल धर्म बदल लेने से किसी व्यक्ति का ST का स्टेटस अपने आप खत्म नहीं हो जाता। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि व्यक्ति की अपनी जनजातीय पहचान और समुदाय से जुड़ाव अभी भी बना हुआ है या नहीं।

ST स्टेटस तय करने के लिए इन बातों पर होगा ध्यान

कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के ST दर्जे को केवल धर्म या शादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए यह देखा जाएगा कि व्यक्ति अपनी जनजाति के रीति-रिवाजों को मानता है या नहीं, समुदाय के लोग उससे जुड़े है या नहीं और जनजाति के लोग उसे अपना सदस्य मानते हैं या नहीं। यानी इसमें सबूतों के आधार पर यह देखा जाएगा कि व्यक्ति की जनजातीय पहचान अब भी बनी हुई है या नहीं।

मामला सोनभद्र की नन्हकी उर्फ नैमुन्निशा का है। महिला ने ST सर्टिफिकेट के आधार पर 2011 से 2018 के बीच ST की जमीनें खरीदीं। जांच में पता चला कि उसने दशकों पहले धर्म बदलकर निकाह कर लिया था।


SDM ने 22 जनवरी 2026 को उसकी जमीन के बैनामे रद्द कर दिए थे। महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने याचिका खारिज कर दी।

अदालत का कहना है की उन्होंने यह फैसला सिर्फ शादी या धर्म बदलने की वजह से नहीं लिया है। बल्कि इसलिए लिया है क्योंकि महिला यह साबित नहीं कर सकी कि जमीन खरीदने के समय भी वह भुइयां जनजाति से जुड़ी हुई थी। इसी आधार पर कोर्ट ने उसकी याचिकाएं खारिज कर दी है।

इस फैसले से यह बात सामने आती है कि ST दर्जे से जुड़े मामलों में सिर्फ प्रमाण पत्र या जन्म की पहचान ही नहीं, बल्कि संबंधित समय पर जनजातीय समुदाय से व्यक्ति के जुड़ाव को भी देखा जा सकता है। जमीन से जुड़े मामलों में यह पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कानून ST समुदाय की जमीन के हस्तांतरण पर विशेष पाबंदियां लगाता है। ये फैसला ST सर्टिफिकेट के दुरुपयोग पर बड़ी रोक लगाएगा। अब सिर्फ कागज पर ST बने रहकर जमीन खरीदने या नौकरी में आरक्षण लेने का खेल नहीं चलेगा। आपको अपनी संस्कृति से जुड़ाव साबित करना ही होगा।

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