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असम में मुस्लिम विवाह का पंजीकरण अब अनिवार्य! काजी प्रथा खत्म, सरकार नियुक्त करेगी रजिस्ट्रार

असम कैबिनेट ने मुस्लिम शादियों के रजिस्ट्रेशन को जरूरी करने और महिला SHG सदस्यों को आधार बनवाने के लिए 31 मार्च 2027 तक का समय देने समेत कई फैसले लिए हैं। इसके अलावा मछली पालन, उद्योग, खेती, रोजगार और राशन से जुड़ी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 25, 2026 पर 10:55 AM
असम में मुस्लिम विवाह का पंजीकरण अब अनिवार्य! काजी प्रथा खत्म, सरकार नियुक्त करेगी रजिस्ट्रार
असम कैबिनेट ने मुस्लिम शादियों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन समेत कई बड़े फैसलों को मंजूरी दी।

गुवाहाटी, 24 सितंबर (PTI), असम कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को कई फैसलों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद बताया कि राज्य में मुस्लिम शादियों का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य होगा। इसके लिए 'असम मुस्लिम विवाह पंजीकरण (अनिवार्य) नियम, 2026' को मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले काजियों से मुस्लिम शादियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी, लेकिन तब इसकी जगह दूसरी व्यवस्था नहीं हुई थी। अब इस कमी को दूर कर पूरे असम में रजिस्ट्रेशन की एक जैसी प्रोसेस बनाई है। ये नए नियम 'असम मुस्लिम विवाह और तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024' की धारा 25 के तहत बनाए गए हैं।

कैबिनेट ने महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) मेंबर को आधार बनवाने के लिए एक बार की छूट दी है। अब ये महिलाएं 31 मार्च 2027 तक आधार एनरोलमेंट करा सकेंगी।

ये लिए कैबिनेट ने 5 बड़े फैसले

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