सूरत (गुजरात), (ANI): गुजरात (Gujarat) के सूरत जिले के बलेथी गांव के लोगों ने मिलकर जंगलों को बचाने का काम किया। इसके लिए गांव के लोगों ने कुछ नियम बनाए और सभी ने उनका पालन किया। गांव के बुजुर्ग जगुदादा और किशोर चौधरी ने लोगों को इस काम के लिए प्रेरित किया।
साल 1986 से 1988 के बीच लगातार तीन साल सूखा पड़ा था। इससे जंगलों को काफी नुकसान हुआ और जमीन बंजर होने लगी। पानी की कमी और पेड़ों के घटने से गांव के लोग परेशान थे। लेकिन गांव वालों की कोशिश से धीरे-धीरे जंगल फिर से हरे-भरे होने लगे।
अब बलेथी गांव के पुराने स्कूल को सुधारकर ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। सरकार ने इसके लिए मंजूरी दे दी है। अगले पांच साल में यहां गुजरात की 2,500 फारेस्ट कमिटी के 7,500 लोगों को जंगल बचाने और उनकी देखभाल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सूखे ने उजाड़ दिए थे गांव के जंगल अब ऐसे बदली गांव की तस्वीर
• जंगलों की निगरानी: गांव के लोगों ने 15 टीमें बनाईं और हर घर से एक सदस्य जंगलों की रखवाली करने लगा।
• वन उपज का बराबर बंटवारा: जंगल से मिलने वाली घास, लकड़ी और बांस जैसी चीजें सभी में बराबर बांटी गईं।
• गैस और पानी की व्यवस्था: जंगलों पर दबाव कम करने के लिए 162 बायोगैस प्लांट और चार छोटे बांध बनाए गए।
• जंगल की देखभाल: गांव की कमिटी ने 229 हेक्टेयर वन क्षेत्र की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली।
जंगलों को बचाने से गांव के लोगों की कमाई भी बढ़ने लगी। अब हर महीने करीब 12,000 से 13,000 लीटर दूध का उत्पादन होता है। चारे का उत्पादन भी पहले से सात गुना बढ़ गया है। बांस बेचकर गांव को 17.7 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई हुई।
वन विभाग ने गांव में 59.4 लाख रुपये से ज्यादा के विकास कार्य कराए। इनमें पानी की पाइपलाइन बिछाना, सड़कें बनाना और लोगों को सिलाई सिखाने की व्यवस्था करना शामिल है।
गांव को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार तो दूसरे गांवों ने भी अपनाया ये तरीका
बलेथी गांव को जंगल बचाने के काम के लिए 1998 में 'इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्ष मित्र पुरस्कार' मिला था। इसके साथ गांव को 50 हजार रुपये और प्रशंसा पत्र भी दिया गया था।
बलेथी गांव के काम से प्रेरित होकर मांडवी तालुका के 65 से ज्यादा गांवों ने भी जंगल बचाने का काम शुरू किया है। अब नए ट्रेनिंग सेंटर में बलेथी के लोग गुजरात के दूसरे गांवों को जंगलों की देखभाल करना और मिलकर गांव का विकास करना सिखाएंगे।