Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात की इस वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में फिर सुनाई देने लगी है शेरों की दहाड़, 144 साल बाद बर्दा बना 17 एशियाटिक शेरों का घर

Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात की बर्दा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी में एक बार फिर से शेरों की दहाड़ सुनाई देने लगी है। लगभग 144 साल बाद बर्दा को 17 एशियाटिक शेरों ने फिर से अपना ठिकाना बना लिया है। यहां शेरों की आबादी के पनपने के लिए उपयुक्त माहौल और भोजन उपलब्ध है

अपडेटेड Oct 17, 2026 पर 1:18 PM
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बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में है।

Barda Wildlife Sanctuary: गुजरात में गिर के जंगलों में एशियाई शेरों की आबादी अब सीमित नहीं रह गई है। इसी राज्य का एक और इलाका शेरों की आबादी की पसंदीदा ठिकाना बनकर उभर रहा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में लगभग 144 सालों से गायब एशियाई शेरों की दहाड़ फिर से सुनाई देने लगी है। यह जंगल अब 17 एशियाई शेरों का घर है।

PLOS One जर्नल में छपी एक स्टडी में पाया गया है कि बर्दा में सही रहने की जगह, पर्याप्त शिकार और ऐसे माहौल के हालात हैं जो लंबे समय तक शेरों की आबादी को सहारा दे सकते हैं। ये नतीजे गिर के अलावा एशियाई शेरों के लिए इस सैंक्चुअरी को दूसरे घर के तौर पर तैयार करने लिए पर्याप्त बता रहे हैं। इससे एशियाई शेरों आबादी को एक ही जगह इकट्ठा करने से जुड़े खतरों को कम करने में मदद मिलेगी।

एशियाई शेर कैसे लौटे बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी

'बियॉन्ड गिर: बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी एज ए पोटेंशियल स्ट्रॉन्गहोल्ड फॉर एशियन लायंस' नाम की इस स्टडी में जानवरों की जांच की गई। शोधकर्ताओं ने छह शेरों, एक नर और पांच मादा को GPS कॉलर लगाए, और जनवरी 2023 और जुलाई 2025 के बीच 169,000 से अधिक लोकेशन पॉइंट रिकॉर्ड किए। आंकड़ों से पता चला कि जानवर बर्दा के जंगलों और घास के मैदानों का इस्तेमाल कर रहे थे और सैंक्चुअरी के अंदर अपना क्षेत्र बना रहे थे।

शेरों की वापसी में प्राकृतिक फैलाव और एक योजनाबद्ध संरक्षण कोशिश, दोनों शामिल थे। एक नर शेर गिर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों से बर्दा में आया। गुजरात फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने बाद में आबादी बनाने में मदद के लिए पांच मादा शेरों को दाखिल किया।

राज्य सरकार ने दशकों पहले बर्दा को एक संभावित वैकल्पिक हैबिटैट के तौर पर पहचाना था। 1979 में, जिस साल सैंक्चुअरी को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था, उसने जंगल को एशियाई शेरों के लिए एक और घर के तौर पर विकसित करने के लिए गिर-बर्दा प्रोजेक्ट शुरू किया।


जंगली सूअर बने शेरों के भोजन का 55% हिस्सा

शेरों की आबादी के पनपने का एक अहम फैक्टर है शिकार की उपलब्धता। इससे तय होता है कि कोई हैबिटैट एक बड़ी शिकारी आबादी को बनाए रख सकता है या नहीं। बार्दा स्टडी में पाया गया कि जंगली सूअरों का रिकॉर्डेड डाइट में 55% हिस्सा था, जबकि पालतू मवेशियों का 17% हिस्सा था।

नतीजे इस बात पर जोर देते हैं कि जैसे-जैसे शेरों की संख्या बढ़ रही है, जंगली शिकार की आबादी को बचाना कितना जरूरी है। एक हैबिटैट उन्हें छिपने और रहने की जगह दे सकता है, लेकिन जानवरों के लंबे समय तक जिदा रहने के लिए एक टिकाऊ फूड सप्लाई भी उतनी ही जरूरी है।

एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए बार्दा क्यों जरूरी है?

एशियाई शेर ज्यादातर गुजरात में पाए जाते हैं, और गिर उनका मुख्य गढ़ है। एक और रहने लायक आबादी बनाने से उन खतरों को कम करने में मदद मिल सकती है जो इतनी सारी प्रजातियों के एक ही इलाके में जमा होने से आते हैं। बार्दा गिर से फैलने वाले शेरों के लिए पॉपुलेशन बफर का भी काम कर सकता है। गुजरात के जंगल और एनवायरनमेंट मिनिस्टर अर्जुन मोढवाडिया ने छोटे हैबिटैट को बचाने और उनके बीच संपर्क बनाए रखने की अहमियत पर जोर दिया है, ताकि वाइल्डलाइफ लैंडस्केप में घूम सकें।

बर्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी कहां है?

बर्दा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में, पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों के कुछ हिस्सों में है। यह 192.31 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है और पोरबंदर शहर से लगभग 15 km दूर है। अपने बेहद छोटे आकार के बावजूद, यह सैंक्चुअरी बबूल, धव, रायन, बेर, जामुन, अमली और बांस सहित कई तरह के पेड़-पौधों का समर्थन करती है। यह गुग्गल जैसे औषधीय पौधों के साथ-साथ कई दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का भी घर है। बड़े वाइल्डलाइफ समुदाय में तेंदुए, लकड़बग्घा और सियार के साथ-साथ सांभर, चीतल और चिंकारा जैसे हिरण भी शामिल हैं।

क्या टूरिस्ट बार्दा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जा सकते हैं?

गुजरात के जंगलों और वाइल्डलाइफ में दिलचस्पी रखने वाले यात्रियों के लिए बार्दा एक विकल्प है। सफारी के मौके सुबह और दोपहर में मिल सकते हैं, लेकिन आगंतुकों को ट्रिप प्लान करने से पहले गुजरात वन विभाग से मौजूदा व्यवस्था और टाइमिंग कन्फर्म कर लेनी चाहिए।

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