बिहार सरकार ने बेटियों की उच्च शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में महिलाओं के लिए ऐसी यूनिवर्सिटी शुरू होने जा रही है, जिसमें स्टूडेंट्स के साथ प्रोफेसर्स भी महिलाएं होंगी। राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पिछले महीने इसका ऐलान किया था। 23 सितंबर को राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग गई।
सरकार ने शुरुआती फंड को मंजूरी दी
राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के संचालन के लिए प्रारंभिक राशि को मंजूरी दे दी है। राज्य के पहले महिला विवि का निर्माण पटना में होगा और इसकी पहचान मां सीता के नाम पर होगी। कैबिनेट की बैठक में बिहार विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत दो विश्वविद्यालयों की स्थापना का फैसला किया गया। विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन के लिए सरकार ने 15 करोड़ रुपये के फंड को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।
अभी राज्य की राजधानी पटना में मौजूद अधिकांश महिला कॉलेज पटना विश्वविद्यालय या पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के तहत आते हैं। सूत्रों के मुताबिक आगे पटना के अधिकांश महिला कॉलेज महिला विश्वविद्यालय के तहत आ सकते हैं। पटना विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले महिला कॉलेजों में बदलाव की संभावना नहीं है। अभी पटना में श्री अरविंद महिला कॉलेज, गंगा देवी महिला कॉलेज, जेडी वीमेंस कॉलेज सहित करीब दर्जनभर महिला कॉलेज हैं।
अभी करीब एक दर्जन महिला कॉलेज हैं
पटना विश्वविद्यालय के अधीन जिले में करीब 10 कॉलेज हैं। इनमें महिलाओं के लिए समर्पित 2 प्रमुख कॉलेज हैं-पटना वीमेंस कॉलेज और मगध महिला कॉलेज। अगर पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी की बात करें तो इसके तहत पटना जिले में 6 प्रमुख महिला कॉलेज हैं। इनमें गंगा देवी महिला महाविद्यालय, जेडी वीमेंस कॉलेज, खगौल स्थित महिला कॉलेज, गर्दनीबाग स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय, गुलजारबाग स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय और बिहटा का बी.बी.एम.बी.जी. कन्या महाविद्यालय शामिल हैं।
कुलपति और प्रोफेसर्स भी महिलाएं होंगी
महिला विश्वविद्यालय बनने की खबर से छात्राओं में खुशी की लहर है। जेडी वीमेंस कॉलेज की छात्रा रुनझुन प्रिया ने कहा कि महिला विश्वविद्यालय बनने से उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने में आसानी होगी। छात्राओं से लेकर कुलपति तक सभी महिलाएं होंगी, जिससे लड़कियों की दिलचस्पी उच्च शिक्षा में बढ़ेगी। एक दूसरी छात्रा ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय में पढ़ाई के साथ शोध और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं, तो यह छात्राओं के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
शोध और रोजगार के पर्याप्त असर पर फोकस जरूरी
पटना यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर और पूर्व डीएसपी डॉ. अखिलेश कुमार ने कहा कि किसी भी नए शैक्षणिक संस्थान की स्थापना एक अच्छी पहल है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला विश्वविद्यालय की जरूरत और इसकी उपयोगिता को जेंडर इक्वालिटी के नजरिए से भी देखने की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर महिला विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर शोध और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं, तो यह सरकार की एक पॉजिटिव पहल साबित हो सकती है।
(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)