बिहार के एक स्टार्टअप ने पानी से आर्सेनिक अलग करने वाली मशीन बनाई है। परीक्षण में सफल रहने के बाद इस मशीन का इस्तेमाल कई जगहों पर हो रहा है। पटना और आसपास के गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक होता है। आर्सेनिक वाला पानी पीने से कई तरह की समस्याएं होती हैं।
छोटी शुरुआत से मिली बड़ी सफलता
इस मशीन को नवमार्ग ने तैयार किया है। नवमार्ग की शुरुआत 2018 में शुरू हुई थी। तब पटना के बिहार बाल भवन किलकारी के छात्रों ने आर्सेनिक प्रदूषण को समझने और उसका समाधान निकालने की कोशिश शुरू की थी। 2019 में इस मशीन के पहले प्रोटोटाइप को सीएसआईआर-आईआईसीटी में प्रदर्शित किया गया। स्टार्टअप की शुरुआत अर्पित कुमार, अभिजीत कुमार, शांभवी सिन्हा और अक्षत आदर्श ने की थी।
मणिपाल एकेडमी से मिल रही है मदद
नवमार्ग को मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन से मदद मिल रही है। कंपनी का मुख्य उत्पाद MARU™ (Magnetic Arsenic Removal Unit) है, जो METAL® (Magnetic Separation Technology for Arsenic Removal) तकनीक पर आधारित है। नवमार्ग के फाउंडर अर्पित कुमार ने कहा, "गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक अक्सर लोहे से जुड़े कणों और सूक्ष्म कणों के साथ मौजूद रहता है। MARU में पानी एक विशेष स्टेनलेस स्टील कॉलम से गुजरता है, जिसमें सीलबंद नियोडिमियम स्थायी चुंबक लगे होते हैं।
चुंबकीय क्षेत्र आर्सेनिक-युक्त लोहे के कणों और कोलॉइड को अलग करता है। इससे पानी साफ हो जाता है। इस पृथक्करण प्रक्रिया में रसायन और फिल्टर की जरूरत नहीं होती है। इस मशीन को लगाने से पहले पानी की व्यापक जांच की जाती है। अभी 13 सर्टिफाइड स्थलों पर इसका इस्तेमाल हो रहा है। भोजपुर और बक्सर के स्कूलों में हुए परीक्षणों में 109 से 141 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक आर्सेनिक वाले पानी को उपचार के बाद 2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से नीचे लाने में सफलता मिली है।
वाटर ट्रीटमेंट की कॉस्ट काफी कम
इस मशीन के जरिए वाटर ट्रीटमेंट की कॉस्ट बहुत कम आती है। एक अनुमान के मुताबिक, लागत सिर्फ 8 रुपये प्रति 1,000 लीटर तक आती है। नवमार्ग की मशीन का इस्तेमाल कर्नाटक के रायचूर जिले में भी पायलट प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है। कंपनी की तकनीक की समीक्षा सीएसआईआर-सीजीसीआरआई और सीएसआईआर-आईआईसीटी ने की है। जनवरी 2023 में तकनीक को जल जीवन मिशन के तहत अभिनव तकनीक के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है नवमार्ग
नवमार्ग का प्लान सिर्फ पानी से आर्सेनिक हटाने तक सीमित नहीं है। कंपनी µSENSE नाम से आर्सेनिक, आयरन और सूक्ष्मजीव संदूषण की इन-लाइन सेंसर इकाइयां विकसित कर रही है।
इसके साथ जलज्योति नाम का जल-गुणवत्ता डेटाबेस भी विकसित किया जा रहा है, जिसमें भूजल की गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों को नक्शे के रूप में व्यवस्थित करने की योजना है। 2026 में नवमार्ग हुल्ट प्राइज इंडिया नेशनल विनर रही। इसे एएसएमई आईशो इंडिया अवॉर्ड और इनोवेशन इन वॉटर टेक्नोलॉजी अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)