बिहार की सड़कों पर जल्द इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का जलवा देखने को मिल सकता है। सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए पटना सहित पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशंस लगाए जाएंगे। इससे लोगों की दिलचस्पी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल में बढ़ेगी।
पहले इन स्थानों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशंस
सबसे पहले सरकारी कार्यालयों, बस डिपो और कमर्शियल कॉम्पलेक्स में चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने की तैयारी है। इन जगहों पर इलेक्ट्रिक कार के साथ ही ई-बसों, दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक व्हीकल्स चार्ज किए जा सकेंगे। इसके लिए बिहार सरकार की तरफ से अनुदान की भी व्यवस्था की गई है। चार्जिंग स्टेशनों को उन जगहों पर इंस्टॉल करने का प्लान है, जहां गाड़ियों की आवाजाही ज्यादा होती है। इससे समय की बचत होगी।
राजधानी पटना में 10 प्रमुख सरकारी परिसरों में फास्ट डीसी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। प्रस्तावित स्थानों में मुख्य सचिवालय, बिहार विधानसभा, समाहरणालय, विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, मल्टी मॉडल हब कंकड़बाग, बेउर मोड़ और हार्डिंग रोड शामिल हैं। ये सभी वैसे स्थान हैं जहां रोजाना काफी गाड़ियों की आवाजाही होती है। नए चार्जिंग स्टेशंस परिवहन विभाग और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बीच हुए समझौते के तहत लगाए जाएंगे। इन फास्ट चार्जिंग स्टेशन के जरिए इलेक्ट्रिक कारों को लगभग 45 से 60 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। इन चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग सिर्फ परिसर के कर्मचारी ही नहीं बल्कि आम लोग भी कर सकते हैं।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी बनेंगे चार्जिंग स्टेशंस
निजी और छोटे गाड़ियों के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए भी चार्जिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है। इसके लिए 50 बसों की क्षमता वाले डिपो में आठ-आठ चार्जिंग पॉइंट विकसित किए जा रहे हैं। इससे ई-बसों को निर्धारित समय में चार्ज करने और उनके नियमित परिचालन में मदद मिल सकती है। फिलहाल, पटना के फुलवारीशरीफ, राजगीर और मुजफ्फरपुर के बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन कार्य कर रहे हैं। शहर में चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें यहीं से चार्ज होती हैं। इसके अलावा, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया में भी निर्माण कार्य चल रहा है। पूर्णिया में भी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
डेढ़ घंटे में चार्ज हो जाएगी ई-बस की बैटरी
एक ई-बस को चार्ज करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगेगा। सार्वजनिक परिवहन के लिए यह व्यवस्था इसलिए जरूरी है, क्योंकि बसों का संचालन तय समय-सारिणी के अनुसार होता है। पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध रहने से वाहनों को दोबारा सेवा में लगाने की प्रक्रिया व्यवस्थित बनी रहेगी।
निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने पर फोकस
चार्जिंग नेटवर्क को केवल सरकारी परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है। इसके लिए बिहार ईवी नीति 2026 के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाले पात्र संस्थानों को मशीनरी और उपकरणों की लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। इस व्यवस्था के दायरे में सरकारी भवन, व्यावसायिक परिसर, होटल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, आवासीय अपार्टमेंट, हाउसिंग सोसायटी, पेट्रोल पंप, हाईवे के ढाबे-रेस्टोरेंट, बस स्टैंड और पार्किंग स्थल आएंगे।