मटका अचार, पत्थर की मूर्ति, साड़ियां और सिल्क ज्वेलरी! जानिए बिहार की इन 5 बिजनेस वूमेन की कहानी जिनकी जिंदगी जीविका ने बदली

जीविका से जुड़कर बिहार की कई महिलाओं ने अपने हुनर को कारोबार में बदल दिया है। प्रिया ने दो साड़ियों से फैशन ब्रांड शुरू किया, अपर्णा ने रेशम की ज्वेलरी, रुकमणि ने मूर्तियां, किरण ने पारंपरिक अचार और प्रेमलता ने अगरबत्ती बनाकर अपनी पहचान बनाई। छोटे स्तर से शुरू हुए इन कामों से अब उन्हें अच्छी कमाई हो रही है और वे दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं।

अपडेटेड Oct 05, 2026 पर 10:26 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
कभी घर तक सीमित थीं, आज लाखों का कारोबार संभाल रही हैं ये महिलाएं

पटना। बिहार की कई महिलाओं ने जीविका से जुड़कर अपने हुनर को कमाई का जरिया बना लिया है। कभी घर और परिवार तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज अपना कारोबार चला रही हैं और अच्छी कमाई कर रही हैं। किसी ने कपड़ों पर पेंटिंग की, तो किसी ने ज्वेलरी, अचार, मूर्तियां और अगरबत्ती बनाकर अपनी पहचान बनाई। जीविका से इन महिलाओं को काम शुरू करने के लिए ट्रेनिंग, आर्थिक मदद और बाजार तक पहुंचने का मौका मिला। छोटे स्तर से शुरू हुआ इनका काम आज धीरे-धीरे बड़ा कारोबार बन गया है।

jeevika km3

 


पटना की प्रिया रंजन को पेंटिंग का शौक था। शादी और बेटी होने के बाद भी उन्होंने अपना यह हुनर नहीं छोड़ा। करीब चार साल पहले उन्होंने सिर्फ दो साड़ियों से आर्टलेट बाय प्रिया के नाम से काम शुरू किया।

आज उनके पास 100 से ज्यादा साड़ियां और करीब 250 सूट हैं। उनकी 15 लोगों की टीम है। सोशल मीडिया और मेलों के जरिए उनके डिजाइन लोगों तक पहुंचे और अब वह अपने ब्रांड को पूरे देश में ले जाना चाहती हैं।

रेशम के धागे से बनाई ज्वेलरी और मूर्ति बनाने की कला

jeevika km4

पालीगंज के मुंगिला गांव की अपर्णा पहले अपने लिए रेशम के धागे से बैंगल बनाती थीं। करीब तीन साल पहले उन्होंने इसे कारोबार बना लिया। अब वह सिल्क थ्रेड ज्वेलरी, मधुबनी पेंटिंग वाले आभूषण और जूट के सामान बनाती हैं। 150 रुपये के बैंगल से शुरू हुआ काम अब सालाना 8 से 10 लाख रुपये की बिक्री तक पहुंच गया है। उनके साथ 6-7 लोग काम करते हैं। सोशल मीडिया, मेलों और थोक ऑर्डर से उनके सामान दूसरे इलाकों तक भी पहुंच रहे हैं।

गया के पत्थरकट्टी गांव की रुकमणि कुमारी ने शादी के बाद पति से पत्थर तराशना सीखा। अब वह गणेश, हनुमान, महादेव और बुद्ध की मूर्तियां बनाती हैं और उनकी बिक्री में भी पति का साथ देती हैं। बोधगया में उनकी अपनी दुकान है और दूसरे शहरों से भी ऑर्डर आते हैं। करीब 2014 में जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें 10 हजार रुपये की मदद मिली थी, जिसे उन्होंने कारोबार बढ़ाने में लगाया।

दादी-नानी की रेसिपी से बनाया अचार का कारोबार

jeevika km

पूर्वी चंपारण की किरण देवी ने 2022 में आम के अचार से काम शुरू किया था। आज वह आम, कटहल, सहजन, करैला, मिर्च और आंवला समेत 20 से 22 तरह के अचार बनाती हैं। इसके साथ बिहारी स्नैक्स भी तैयार करती हैं। किरण अपने अचार मटके में पुराने तरीके से तैयार करती हैं। जीविका से जुड़ने के बाद उन्हें अपने सामान की बिक्री के लिए मंच मिला। अब वह सरस मेले जैसे आयोजनों में भी अपने प्रोडक्ट बेचती हैं और सालाना लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं।

पति के साथ हुए हादसे के बाद उन्होंने शुरू किया अगरबत्ती का काम

jeevika km5

बेगूसराय की प्रेमलता कुमारी के पति हादसे में अपना हाथ गंवा बैठे थे। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए उन्होंने काम शुरू किया। 2017 में जीविका से जुड़कर उन्होंने अगरबत्ती और धूप बनाने की ट्रेनिंग ली और 40 हजार रुपये की मदद से काम शुरू किया।

पहले बरामदे से शुरू हुआ काम अब घर की छत तक पहुंच गया है। वह छह तरह की खुशबू वाली अगरबत्ती और धूप बनाती हैं। उनके साथ पांच लोग काम करते हैं और रोज करीब 40 किलो सामान तैयार होता है। रोज 8 से 10 हजार रुपये तक की बिक्री होती है।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

हिंदी में शेयर बाजार,  स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।