Success Story: मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने वाले उद्यमी ने बताया कि उनके परिवार में किसी का बिजनेस बैकग्राउंड नहीं था। पत्नी, पिता और भाई सभी नौकरी करते रहे हैं। मिडिल क्लास परिवार में नौकरी को सुरक्षित विकल्प माना जाता है, इसलिए बिजनेस में आने का फैसला आसान नहीं था। हालांकि, परिवार के सहयोग से उन्होंने नौकरी छोड़कर कारोबार शुरू किया। उनके मुताबिक उन्होंने और को-फाउंडर सुमित ने नाइट शिफ्ट में नौकरी करते हुए बिजनेस शुरू करने का विचार बनाया था।
कोविड महामारी के बाद बदलते माहौल को देखते हुए दोनों ने सेकंड सोर्स ऑफ इनकम के तौर पर काम शुरू किया। लेकिन आज यही उनका फर्स्ट सोर्स ऑफ इनकम बन चुका है और दोनों फुल टाइम बिजनेस कर रहे हैं।
नाइट शिफ्ट में ड्यूटी के दौरान आया बिजनेस का आइडिया
उद्यमी ने बताया कि उन्हें 2005-06 से नौकरी का अनुभव है। जिस कंपनी में उन्होंने सबसे ज्यादा समय काम किया, वहां शुरुआत के समय उनकी सैलरी करीब 30-35 हजार रुपये थी। करीब दो-तीन साल पहले जब उन्होंने नौकरी छोड़ी, तब उनका पैकेज 24-25 लाख रुपये सालाना था। इस पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर बिजनेस में आने का फैसला उनके लिए काफी कठिन था, लेकिन उन्होंने लोगों को एक अच्छा अनुभव देने और भरोसा कायम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया।
बिजनेस की शुरुआत से पहले उन्होंने और सुमित ने खुद एक स्टोर खोलकर पूरे काम को समझने की कोशिश की। नाइट शिफ्ट के बाद दोनों स्टोर के लिए सामान, रैक, ब्रांडिंग, मार्जिन और सेटअप समेत तमाम चीजों पर रिसर्च करते थे। इसी दौरान उन्हें लगा कि नए लोगों के लिए बाजार में बिजनेस शुरू करने से जुड़ी कई परेशानियां हैं।
बिना फीस के हम करते है ये सब काम
इसी एक्सपीरियंस से BuyBuyCart की शुरुआत हुई। उद्यमी आशीष पांडेय के मुताबिक नए कारोबारी को यह तक पता नहीं होता कि दुकान के लिए कौन सा सॉफ्टवेयर लेना है, मार्केटिंग और ब्रांडिंग कैसे करनी है, कौन सा सामान रखना है, किस कीमत पर बेचना है और कितना मार्जिन रखना है। खुद इन समस्याओं से गुजरने के बाद उन्होंने ऐसे लोगों की मदद करने का फैसला किया, जो अपना काम शुरू करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है। उनके मुताबिक उन्होंने और को-फाउंडर सुमित ने नाइट शिफ्ट में नौकरी करते हुए बिजनेस शुरू करने का विचार बनाया था।
आज कंपनी के 300 से ज्यादा सामान्य BuyBuyCart स्टोर हैं। कई स्टोर पाइपलाइन में हैं। आशीष पांडेय ने बताया कि वर्ष 2022-23 के दौरान वे करीब 8 लाख रुपये में स्टोर खोलकर देते थे। जबकि इसी मॉडल में काम करने वाली कुछ अन्य कंपनियां 6-8 लाख रुपये तक फ्रेंचाइजी फीस लेती थीं। कंपनी ने इसके बजाय फ्रेंचाइजी फीस और रॉयल्टी नहीं लेने का मॉडल अपनाया। अभी कंपनी का टर्नओवर 62 करोड़ रुपये है। वहीं, 26-27 के फायनेंस ईयर में इसे 90-100 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है।
इन सबका किया जाता है पहले आकलन
कंपनी के मुताबिक आज भी फ्रेंचाइजी लेने वाले से कोई फ्रेंचाइजी फीस या रॉयल्टी फीस नहीं ली जाती। स्टोर में लगने वाली वास्तविक लागत, जैसे रैक, ब्रांडिंग और अन्य जरूरी सामान की लागत के आधार पर स्टोर तैयार किया जाता है। प्रक्रिया में पहले इच्छुक व्यक्ति की सहमति और टोकन अमाउंट के बाद कंपनी की टीम लोकेशन और एरिया का सर्वे करती है। वहां किस तरह का सामान चल सकता है, इसका भी आकलन किया जाता है।
इसके बाद यदि ग्राहक की तरफ से दुकान तैयार है और जरूरी चीजें उपलब्ध हैं, तो कंपनी 15 दिन में स्टोर खोलने का दावा करती है। उद्यमी ने बताया कि उन्हें अपनी पहली दुकान तैयार करने में डेढ़ से दो महीने लगे थे और इस दौरान करीब दो महीने का किराया भी चला गया था, इसलिए अब वे फ्रेंचाइजी लेने वालों के इस समय और खर्च को कम करने पर जोर देते हैं।
(नोएडा से सुमित राजपूत की रिपोर्ट)