रामनगर के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की करीब 80 साल की हथिनी सोनाकली का निधन हो गया। सोनाकली ने शनिवार रात इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। सोनाकली का उम्र से जुड़ी बीमारियों से ग्रस्त थी। वहीं इलाज कै दौरान उसकी मौत हुई। अधिकारियों ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। सोनाकली कई सालों तक वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू अभियानों का हिस्सा रही थी। उनके निधन के बाद रविवार को वन विभाग के कर्मचारियों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान उन्हें सेरेमोनियल सैल्यूट भी दिया गया।
कई अभियानों में निभाई मुख्य भुमिका
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर साकेत बडोला ने सोनाकली की मौत को रिजर्व के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने कहा कि सोनाकली ने कई बाघों को बचाने के अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी। सोनाकली की उम्र बढ़ने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से साल 2018 में रिटायर कर दिया गया था।
कब लाया गया था टाइगर रिजर्व
सोनाकली को साल 1997 में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में लाया गया था। उन्होंने 1997 से 2002 तक ढिकाला जोन में काम किया। इसके बाद 2002 से 2016 तक हल्दूपाराव और कालागढ़ क्षेत्रों में तैनात रहीं। साल 2016 में उन्हें फिर ढिकाला रेंज में जिम्मेदारी दी गई, जहां उन्होंने रिटायरमेंट तक काम किया। वन्यजीवों की सुरक्षा और बाघों को बचाने के कई अभियानों में अहम योगदान देने वाली सोनाकली 23 जनवरी 2018 को रिटायर हो गई थीं।
सोनाकली ने लगभग 21 साल तक ढिकाला, हल्दूपड़ाव-कालागढ़ और ढिकाला रेंज मे अलग-अलग इलाकों में वन विभाग के साथ काम किया। इस दौरान उसने कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में वनकर्मियों की मदद की और वन्यजीवों को बचाने में अहम योगदान दिया। सोनाकली ने अपने कार्यकाल के दौरान कई मुश्किल अभियानों में वन विभाग की मदद की थी। साल 2011 में उसने एक आदमखोर बाघ को पकड़ने के अभियान में अहम भूमिका निभाई।