दिल्ली के एक एक्सिडेंट में पैर गंवाने वाली 26 साल की रीना को मिलेगा 2.55 करोड़ का मुआवजा! ट्रिब्यूनल ने सुनाया गजब का फैसला

दिल्ली की मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2024 के एक दुर्घटना मामले में 26 साल की रीना को 2.55 करोड़ रुपये का मुआवता देने का फैसला सुनाया है। रीना के स्कूटर को एक ट्रक पे टक्कर मार दी थी, जिसके बाद घुटने के नीचे उसका बायां पैर काटना पड़ा था। यह दुर्घटना पीरागढ़ी चौक पर हुई थी।

अपडेटेड Oct 19, 2026 पर 7:46 PM
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रीना अपने दो साल के बेटे के साथ पीछे बैठी थी, तभी ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी।

दिल्ली में एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2024 में हुई दुर्घटना में पैर गंवाने वाले महिला उद्यमी के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। इस दुर्घटना में 26 साल की एंटरप्रेन्योर रीना के स्कूटर को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद घुटने के नीचे उसका बायां पैर कट गया था। दिल्ली की ट्रिबयूनल ने इस मामले में 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।

पीठासीन अधिकारी गुंजन गुप्ता रीना की दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने ट्रक की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 22 फरवरी, 2025 से 30 दिनों के अंदर 9% सालाना ब्याज के साथ 2.55 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। 15 अक्टूबर के अपने आदेश में, ट्रिब्यूनल ने कहा, "इस फैसले के पहले के हिस्से में याचिकाकर्ता की फंक्शनल डिसेबिलिटी को 100% माना गया है। बताई गई डिसेबिलिटी और उससे होने वाली दिक्कतों के साथ, सुधार की कोई संभावना नहीं होने पर, याचिकाकर्ता वैसी जिंदगी नहीं जी पाएगी जैसी वह एक्सीडेंट से पहले जीती थी।"

यह एक्सीडेंट 5 नवंबर, 2024 को पीरागढ़ी चौक पर हुआ था। रीना अपने दो साल के बेटे के साथ पीछे बैठी थी, तभी ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी। ट्रक का एक पहिया उसके बाएं पैर पर चढ़ गया, जिसे बाद में काटना पड़ा। उसकी तीन सर्जरी हुईं। बीमा कंपनी ने स्कूटर चलाने वाले को दोषी ठहराया और कहा कि महिला ने हेलमेट नहीं पहना था। ट्रिब्यूनल ने इन बातों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रैश ड्राइविंग पर रीना की गवाही का कोई जवाब नहीं था। ट्रक का ड्राइवर-कम-मालिक, महिंदर सिंह, ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ एक उल्टा नतीजा निकाला गया।

ट्रिब्यूनल ने भविष्य में कमाने की क्षमता के नुकसान के लिए याचिकाकर्ता रीना को 1.68 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा अवॉर्ड किया। हालांकि बाएं निचले अंग के लिए विकलांगता 80% सर्टिफाइड थी, ट्रिब्यूनल ने फंक्शनल विकलांगता को 100% माना क्योंकि रीना को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया।

घटना के समय याचिकाकर्ता परिवार की महीने की इनकम 58,915 रुपये थी, जिसमें एक होममेकर के तौर पर उसके योगदान के 6,000 रुपये शामिल थे। उसके दो से चार साल के तीन बच्चे हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिल न होने की वजह से मेडिकल खर्च से मना नहीं किया जा सकता और गलत काम करने वाले को पीड़ित की मेडिक्लेम पॉलिसी का फायदा नहीं मिल सकता। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को अलग-अलग मदों में कुल 2.55 करोड़ रुपये दिए।

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