दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है लेकिन जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। बुधवार को यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 452 तक पहुंच गया। इसे एयर पलूशन की गंभीर (Severe) कैटिगरी माना जाता है।
आपको बता दें कि जहांगीरपुरी में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदूषण का स्तर ऊंचा बना हुआ है। यहां का 24 घंटे का औसत AQI भी लगातार बढ़ा है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इलाके में औद्योगिक गतिविधियों से होने वाला उत्सर्जन, हवा की रफ्तार में कमी और प्रदूषकों को फैलने से रोकने वाली प्रतिकूल परिस्थितियां इसकी बड़ी वजह हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स ने यह भी आशंका जताई है कि जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास स्थित एक ऊंची इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में बाधा डाल सकती है। हालांकि प्रदूषण के लगातार बढ़े स्तर के पीछे किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं बताया गया है। इसके लिए स्थानीय उत्सर्जन और मौसम से जुड़ी परिस्थितियों के मिले-जुले असर की बात कही गई है।
जहांगीरपुरी में AQI 452, लगातार बढ़ रहा प्रदूषण
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार दोपहर 2 बजकर 5 मिनट पर जहांगीरपुरी के मॉनिटरिंग स्टेशन पर AQI 452 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़े भी बताते हैं कि यहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ा है। जहांगीरपुरी में 31 अक्टूबर को 243 के स्तर पर रहा AQI अगले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा। रविवार को यह 378 और सोमवार को 436 तक पहुंच गया। मंगलवार को 24 घंटे का औसत AQI 462 दर्ज किया गया। बुधवार को दोपहर के समय भी यहां का AQI 452 रहा। पिछले कुछ दिनों से जहांगीरपुरी दिल्ली के उन प्रदूषण हॉटस्पॉट में शामिल है, जहां शहर के दूसरे मॉनिटरिंग स्टेशनों के मुकाबले सबसे अधिक AQI दर्ज किया जा रहा है।
जहांगीरपुरी में प्रदूषण बढ़ने की क्या है वजह?
जहांगीरपुरी में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। Envirocatalysts के संस्थापक और लीड एनालिस्ट सुनील दहिया ने पीटीआई से बातचीत में इसके लिए तीन प्रमुख कारकों की ओर इशारा किया है। इनमें औद्योगिक उत्सर्जन, हवा की कम होती रफ्तार और प्रदूषकों के फैलाव में संभावित बाधा शामिल हैं। सुनील दहिया के मुताबिक जहांगीरपुरी के आसपास औद्योगिक गतिविधियां काफी ज्यादा हैं। उद्योगों में होने वाली दहन प्रक्रिया (Combustion) से प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है, जिससे हवा में PM2.5 का स्तर बढ़ सकता है। उनका कहना है कि इलाके में औद्योगिक गतिविधियों के कारण होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण के ऊंचे स्तर की एक प्रमुख वजह हो सकता है। जब पहले से ही प्रदूषण का स्तर अधिक हो और स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन जारी रहे, तो हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है।
प्रदूषण बढ़ने की दूसरी वजह पिछले कुछ दिनों में हवा की स्पीड में आई गिरावट बताई गई है। सुनील दहिया के मुताबिक हवा की रफ्तार कम होने से वातावरण में मौजूद प्रदूषकों को फैलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पा रहा है। पहले से प्रदूषण का स्तर ऊंचा होने और हवा का वेंटिलेशन ठीक नहीं रहने के कारण प्रदूषक एक ही क्षेत्र में जमा हो सकते हैं। इससे जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर लगातार ऊंचा बना रह सकता है। सुनील दहिया ने जहांगीरपुरी के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के पास मौजूद एक ऊंची इमारत की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनके मुताबिक स्टेशन के एक तरफ स्थित यह इमारत प्रदूषकों के उचित तरीके से फैलने में रुकावट पैदा कर सकती है। अगर प्रदूषकों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास उनका जमाव बढ़ सकता है।
दिल्ली का औसत AQI भी 378, हवा बहुत खराब श्रेणी में
जहांगीरपुरी में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने के साथ ही दिल्ली की समग्र वायु गुणवत्ता भी चिंताजनक बनी हुई है। बुधवार दोपहर 3 बजकर 5 मिनट पर राजधानी का औसत AQI 378 दर्ज किया गया। यह बहुत खराब (Very Poor) श्रेणी में आता है।
आपको बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मानकों के मुताबिक AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है। इनके आधार पर हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर का आकलन किया जाता है। 0-50 अच्छी (Good),
51-100 संतोषजनक (Satisfactory), 101-200 मध्यम (Moderate), 201-300 खराब (Poor), 301-400 बहुत खराब (Very Poor), 401-500 गंभीर (Severe).
दिल्ली में GRAP का दूसरा चरण लागू, प्रदूषण रोकने के लिए क्या हो रहे उपाय?
दिल्ली में फिलहाल ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू है। यह तब लागू किया जाता है जब शहर की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच जाती है। GRAP के दूसरे चरण के तहत 12 सूत्रीय कार्ययोजना के माध्यम से प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। इसमें मुख्य रूप से सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।