Delhi AQI today: दिल्ली का AQI पहुंचा 480 के पार, कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज

Delhi AQI today: जहांगीरपुरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा, जहां AQI 459 दर्ज किया गया। इसके बाद IIT दिल्ली (447), पंजाबी बाग (446) और AIIMS (402) का नंबर रहा; ये सभी 'गंभीर' (severe) श्रेणी में आते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हवा की धीमी गति और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण आने वाले दिनों में राजधानी में प्रदूषण का संकट और गहरा सकता है।

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 9:27 AM
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सात निगरानी केंद्रों (monitoring stations) पर AQI का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो इसे 'गंभीर' श्रेणी में रखता है।

Delhi AQI today: गुरुवार सुबह दिल्ली की हवा की गुणवत्ता 'खतरनाक' (hazardous) श्रेणी में बनी रही। सुबह 8:01 बजे कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 482 दर्ज किया गया, जबकि राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' (severe) बना रहा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सात निगरानी केंद्रों (monitoring stations) पर AQI का स्तर 400 से ऊपर दर्ज किया गया, जो इसे 'गंभीर' श्रेणी में रखता है। जहांगीरपुरी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका रहा, जहां AQI 459 दर्ज किया गया। इसके बाद पंजाबी बाग में सबसे अधिक AQI 446 दर्ज किया गया, इसके बाद नरेला में 434, रोहिणी में 431, आरके पुरम में 416, बवाना में 412, दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में 408 और पटपड़गंज में 405 AQI दर्ज किया गया।

कई अन्य इलाकों में हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' (very poor) श्रेणी में रही। ओखला फेज-2 और इंडिया गेट दोनों जगह AQI 399 दर्ज किया गया, इसके बाद ITO में 397, द्वारका सेक्टर 8 में 396, चांदनी चौक में 356 और वसुंधरा एन्क्लेव में 330 AQI रहा।


आनंद विहार में AQI 293 दर्ज किया गया, जबकि IMD लोधी रोड स्टेशन पर यह 268 रहा; ये दोनों ही 'खराब' (poor) श्रेणी में आते हैं। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता के 'गंभीर' (severe) श्रेणी में पहुंचने पर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि केंद्र का वायु गुणवत्ता पैनल मौसम संबंधी स्थितियों - जैसे हवा की दिशा, गति और हवा के बहाव - पर लगातार नजर रख रहा है।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट तब आई है, जब पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में 'कमी' आई है। सरकार का दावा है कि धान की पराली के एक बड़े हिस्से का प्रबंधन 'एक्स-सीटू' (ex-situ) तरीके से किया गया है।

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा- "हां, मैंने पहले ही बताया है कि इस बार धान की लगभग 40 प्रतिशत पराली का इस्तेमाल 'एक्स-सीटू' (खेत के बाहर) प्रबंधन के जरिए किया गया है।"

इन उपायों के बावजूद हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) के 'गंभीर' (सीवियर) श्रेणी में बने रहने को लेकर ANI के सवाल का जवाब देते हुए यादव ने कहा कि CAQM मौसम संबंधी स्थितियों पर बारीकी से नजर रख रहा है और अपने आकलन के आधार पर जरूरी कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा- "CAQM लगातार मौसम संबंधी स्थितियों पर नजर रख रहा है, जिसमें हवा की दिशा, हवा की गति और हवा का बहाव शामिल है। इन आकलनों के आधार पर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।"

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