Delhi Master Plan: क्या दिल्ली में जमीन खरीदने का सही समय? एक्सपर्ट ने बताई 1511 अप्रूव्ड कॉलोनियों से लेकर DDA प्लॉट तक की स्ट्रैटिजी
Master Plan for Delhi: दिल्ली का नया मास्टर प्लान एक लंबी अवधि का शहरी नियोजन दस्तावेज है, जो यह तय करता है कि देश की राजधानी में आने वाले समय में कहां आवासीय इलाके, बाजार, दुकानें, उद्योग, पार्क और ग्रीन जोन विकसित होंगे। इसके अलावा सड़क, मेट्रो और परिवहन नेटवर्क के विस्तार तथा दिल्ली के भविष्य के शहरी विकास की दिशा भी इसी तरह की योजना से तय होती है
Master Plan for Delhi: एक्सपर्ट का कहना है कि दिल्ली में जमीन में पैसे लगाने का यही सही समय है। लेकिन पहले आप पूरी डिटेल्स की जानकारी ले लें
Master Plan for Delhi: दिल्ली का नया मास्टर प्लान (Master Plan for Delhi-MPD) जारी हो चुका है। यह एक लंबी अवधि का शहरी नियोजन दस्तावेज है, जो यह तय करता है कि देश की राजधानी में आने वाले समय में कहां आवासीय इलाके, बाजार, दुकानें, उद्योग, पार्क और ग्रीन जोन विकसित होंगे। इसके अलावा सड़क, मेट्रो और परिवहन नेटवर्क के विस्तार तथा दिल्ली के भविष्य के शहरी विकास की दिशा भी इसी तरह की योजना से तय होती है। इसे मुख्य रूप से दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) तैयार करता है।
मास्टर प्लान के बाद दिल्ली में जमीन और प्रॉपर्टी में निवेश को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रॉपर्टी एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा ने हमारे सहयोगी 'लोकल 18' से बातचीत में कहा कि दिल्ली के कई इलाकों में जमीन की कीमतें अभी भी NCR के कुछ प्रमुख शहरों की तुलना में अलग स्तर पर हैं। मास्टर प्लान के कारण भविष्य में कई क्षेत्रों में विकास की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, उन्होंने जमीन खरीदने से पहले मास्टर प्लान, सरकारी नीतियों और जमीन के कानूनी दस्तावेजों की जांच को बेहद जरूरी बताया।
दिल्ली के मुकाबले NCR में जमीन कहां कितनी?
प्रदीप मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली के साउथ दिल्ली, सिविल लाइंस और लुटियंस जोन जैसे इलाकों में जमीन की कीमत करीब 10-12 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक बताई जाती है। इतनी ऊंची कीमतें आम खरीदार के बजट से बाहर हैं। मास्टर प्लान किसी इलाके के भविष्य के विकास की दिशा समझने में मदद कर सकता है। लेकिन इसे जमीन की कीमत बढ़ने की गारंटी नहीं माना जा सकता। निवेश का फैसला करने से पहले मास्टर प्लान के आधिकारिक लैंड-यूज रिकॉर्ड, संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और प्रॉपर्टी के कानूनी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच करना सबसे महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से लोग दिल्ली से बाहर NCR के इलाकों में जमीन तलाशते हैं। उदाहरण के तौर पर:-
गुरुग्राम: करीब 3-4 लाख रुपये प्रति वर्ग गज
फरीदाबाद: करीब 2 लाख रुपये प्रति वर्ग गज
हालांकि, किसी इलाके की कीमत केवल उसके मौजूदा रेट से तय नहीं होती। वहां की लैंड यूज कैटेगरी, सड़क की चौड़ाई, सरकारी अप्रूवल, मालिकाना हक और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
मास्टर प्लान में कृषि जमीन पर नजर क्यों?
एक्सपर्ट के मुताबिक, जो लोग दिल्ली में घर या जमीन खरीदना चाहते हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि संबंधित जमीन मास्टर प्लान में किस श्रेणी में आती है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों को फिलहाल कृषि भूमि के तौर पर चिन्हित किया गया है, वहां भविष्य में विकास के साथ अपार्टमेंट या अन्य निर्माण की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि, सिर्फ कृषि जमीन देखकर भविष्य में निर्माण की उम्मीद करना जोखिम भरा हो सकता है। जमीन का वास्तविक इस्तेमाल सरकारी मंजूरी और लागू नियमों पर निर्भर करता है।
ग्रीन जोन में फार्महाउस का विकल्प
प्रदीप मिश्रा ने ग्रीन जोन में फार्महाउस से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, 2.5 एकड़ के प्लॉट पर फार्महाउस बनाया जा सकता है और निर्माण के लिए तय नियमों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि निर्माण पर 10,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से जुड़ी नीति लागू है। निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण को मंजूरी नहीं मिलती। इसी वजह से कुछ ऐसे इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमतों में लंबे समय से ज्यादा तेजी नहीं आई है।
जहां मौजूदा फार्महाउस मालिकों के लिए कीमतों का ठहराव नुकसान का कारण हो सकता है। वहीं नए खरीदारों के लिए कम कीमत पर जमीन मिलने की संभावना बनती है। एक्सपर्ट के मुताबिक, सामान्य प्लॉट करीब 4-6 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के आसपास उपलब्ध हो सकते हैं।
18 मीटर सड़क वाले प्लॉट पर खास नजर
एक्सपर्ट के अनुसार, सरकारी नियमों के तहत 18 मीटर चौड़ी सड़क से जुड़े प्लॉट पर फार्महाउस निर्माण की संभावनाएं होती हैं। ऐसे प्लॉटों की कीमत करीब 7-9 करोड़ रुपये तक बताई गई है। यही वजह है कि मास्टर प्लान के साथ सड़क नेटवर्क को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी जमीन का भविष्य केवल इस बात से तय नहीं होता कि वह आज कितनी सस्ती है। बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि भविष्य में वहां सड़क और दूसरी सुविधाएं वास्तव में विकसित होंगी या नहीं।
दिल्ली की 1,511 कॉलोनियों का भी जिक्र
प्रदीप मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली में 1,511 कॉलोनियों को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। इनमें जमीन खरीदने का विकल्प मौजूद है। लेकिन उन्होंने खरीदारों को खास तौर पर क्लियर लीगल टाइटल वाली प्रॉपर्टी खरीदने की सलाह दी। जमीन खरीदते समय केवल विक्रेता के कागज देखना पर्याप्त नहीं है। खरीदार को जमीन की टाइटल हिस्ट्री, रजिस्ट्री, लैंड यूज, संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी और किसी कानूनी विवाद की भी जांच करनी चाहिए।
PM-UDAY वाली प्रॉपर्टी में सावधानी जरूरी
PM-UDAY योजना के तहत आने वाली प्रॉपर्टी को लेकर भी एक्सपर्ट ने सावधानी बरतने को कहा। उनके अनुसार, कई मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी तरह स्थापित न होने के कारण कुछ संपत्तियों का सरकारी रिकॉर्ड में मालिक के नाम पर पूरा रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पाया है।
ऐसी प्रॉपर्टी करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये प्रति वर्ग गज की कीमत में उपलब्ध होने की बात कही गई है। लेकिन कम कीमत देखकर तुरंत निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए ऐसी संपत्ति खरीदने से पहले उसके कानूनी मालिकाना हक और सरकारी रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी है।
DDA के प्लॉट भी एक विकल्प
दिल्ली में DDA के प्लॉट भी निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकते हैं। एक्सपर्ट ने नरेला, द्वारका और रोहिणी जैसे इलाकों का उदाहरण दिया, जहां DDA ने अलग-अलग आकार के प्लॉट बेचे हैं।
इन क्षेत्रों में जमीन की कीमत करीब 2-8 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक बताई गई है। हालांकि, यहां भी कीमत के साथ-साथ प्लॉट की लोकेशन, साइज, अप्रूवल और भविष्य की कनेक्टिविटी देखना जरूरी है।
मास्टर प्लान के साथ सड़क नेटवर्क को समझना सबसे जरूरी
प्रॉपर्टी एक्सपर्ट के मुताबिक, नए मास्टर प्लान में रोड नेटवर्क का लेआउट बेहद महत्वपूर्ण है। किसी इलाके की जमीन में वास्तविक फायदा तब दिखाई दे सकता है जब प्रस्तावित सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं जमीन पर लागू हों।
यानी सिर्फ मास्टर प्लान में किसी सड़क का प्रस्ताव होना और उसका वास्तव में बन जाना, दोनों अलग बातें हैं। इसलिए निवेश से पहले यह जांचना जरूरी है कि संबंधित परियोजना किस चरण में है। जमीन पर उसका काम कब और कैसे होगा। और उस पर कोई कानूनी या प्रशासनिक अड़चन तो नहीं है।
जमीन खरीदने से पहले इन 5 चीजों की जांच करें
अगर मास्टर प्लान को ध्यान में रखकर दिल्ली या NCR में जमीन खरीदने की योजना है, तो केवल सस्ते रेट को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। खासतौर पर इन बातों की जांच जरूरी है:-
मास्टर प्लान में जमीन का लैंड यूज क्या है?
जमीन का टाइटल और मालिकाना हक पूरी तरह साफ है या नहीं?
क्या प्लॉट पर निर्माण की कानूनी अनुमति है?
सड़क और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं सिर्फ प्रस्तावित हैं या जमीन पर लागू भी हो रही हैं?
DDA, MCD, RERA या अन्य संबंधित प्राधिकरण से जरूरी मंजूरियां मौजूद हैं या नहीं?