CJP के ‘चलो संसद’ मार्च से पहले हाई अलर्ट पर दिल्ली पुलिस, अभेद्य किले में तब्दील जंतर-मंतर और संसद

CJP Parliament March: दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' विरोध मार्च से पहले BNSS की धारा 163 के तहत बड़ी भीड़ जमा होने पर रोक लगाने वाले आदेश जारी किए हैं। CJP को विपक्षी दलों के नेताओं और उनसे जुड़े एक्टिविस्ट्स का समर्थन मिला है

अपडेटेड Jul 20, 2026 पर 9:37 AM
CJP Parliament March: जंतर-मंतर से लेकर संसद पर दिल्ली पुलिस के भारी संख्या में जवान तैनात हैं

CJP Parliament March: संसद के मानसून सत्र और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च को देखते हुए सोमवार (20 जुलाई) को दिल्ली पुलिस अत्यधिक सतर्क है। जंतर-मंतर, संसद और अन्य प्रमुख स्थानों के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत तमाम पाबंदिया लागू कर दी है। यह सुरक्षा व्यवस्था ऐसे समय में कड़ी की गई है, जब BNSS ने NEET में कथित अनियमितताओं के विरोध तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को ‘चलो संसद’ मार्च का ऐलान किया है।

पुलिस ने एक बयान में कहा, "दिल्ली पुलिस साफ़ तौर पर स्पष्ट करती है कि ऐसे किसी भी विरोध मार्च या जुलूस के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई है और न ही दी गई है।" नई दिल्ली जिले में अभी BNSS की धारा 163 (पहले CrPC की धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू है। CJP ने NEET-UG में गड़बड़ियों के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर इस मार्च की घोषणा की थी।

एडवाइजरी जारी


पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एडवाइजरी में कहा, "दिल्ली पुलिस स्पष्ट करती है कि इस तरह के किसी भी विरोध मार्च या जुलूस के लिए न तो अनुमति मांगी गई है और न ही दी गई है।" उन्होंने कहा कि नई दिल्ली जिले में वर्तमान में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। पुलिस उपायुक्त ने कहा कि पूर्व अनुमति के बिना जंतर-मंतर स्थित निर्धारित विरोध स्थल को छोड़कर विरोध मार्च, जुलूस, प्रदर्शन तथा पांच या उससे अधिक लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध है।

उन्होंने चेताया कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 तथा अन्य लागू प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से कानून का पालन करने, किसी भी अनधिकृत सभा या मार्च में शामिल न होने तथा सार्वजनिक शांति, सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, अवरोधक लगाए गए हैं और प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की सघन जांच की जा रही है।

CJP को मार्च की अनुमति नहीं मिली

पुलिस ने स्पष्ट किया कि CJP ने प्रस्तावित मार्च के लिए कोई अनुमति प्राप्त नहीं की है। अधिकारियों ने कहा, "हम उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र की ओर किसी भी अनधिकृत मार्च की अनुमति नहीं देंगे। संसद सत्र के दौरान निवारक सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।" नई दिल्ली, मध्य दिल्ली और उत्तर दिल्ली के कुछ हिस्सों में बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाए गए हैं। कड़ी निगरानी रखी जा रही है। 24 घंटे गश्त की व्यवस्था की गई है। कई एंट्री प्वॉइंट को उच्च सुरक्षा क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, "नई दिल्ली जिले में प्रवेश करने वाले प्रत्येक वाहन की गहन जांच की जा रही है। रणनीतिक स्थानों पर अतिरिक्त जांच चौकियां स्थापित की गई हैं। किसी भी जरूरत के लिए आरक्षित बलों को तैयार रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भी बढ़ा दी गई है।" उन्होंने बताया कि संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस, शंकर चौक और अन्य प्रमुख प्रतिष्ठानों के आसपास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल तैनात किए गए हैं।

सोनम वांगचुक अस्पताल में भर्ती

इस बीच, विरोध स्थल पर घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। दिल्ली पुलिस शनिवार को भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। वांगचुक ने अस्पताल से जारी अपने संदेश में समर्थकों से 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की।

मानसून सत्र की हंगामेदार शुरुआत के आसार

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सत्तापक्ष एवं विपक्ष की रणनीति को देखते हुए इसके हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक और लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा को लेकर मतभेद सामने आए।

विपक्षी दलों ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा घोटाले, नीट पेपर लीक, एथनॉल वाला पेट्रोल, मणिपुर की स्थिति, किसानों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली समेत कई विषयों पर चर्चा की मांग की। जबकि सरकार ने दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की।

सर्वदलीय बैठक की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) से जुड़े बगावत के मामलों को लेकर विपक्षी दलों ने कुछ देर के लिए वॉकआउट किया। विपक्ष ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के समूह को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि विपक्ष ने राम मंदिर चंदा चोरी, एथनॉल, छात्रों से जुड़े मुद्दों और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की मांग की है।

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समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने पेपर लीक, निर्वाचन आयोग की कथित एकपक्षीय कार्यवाही और सरकारी सेवाओं में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग की कथित उपेक्षा का मुद्दा उठाया।

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