Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा 'खराब' श्रेणी में, AQI 238 पर पहुंचा, GRAP-1 लागू

Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर बिगड़ने लगी है। बुधवार को राजधानी का AQI बढ़कर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। हवा की गुणवत्ता में आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली में GRAP के पहले चरण यानी स्टेज-1 को लागू कर दिया है।

अपडेटेड Oct 21, 2026 पर 3:56 PM
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दशहरे के बाद बिगड़ी दिल्ली की हवा, GRAP-1 लागू

Delhi Pollution: दशहरे के जश्न के बाद दिल्ली की हवा एक बार फिर बिगड़ने लगी है। बुधवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बढ़कर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया। हवा की गुणवत्ता में आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण यानी स्टेज-1 को लागू कर दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार सुबह 10 बजे दिल्ली का AQI 238 दर्ज किया गया। इस सीजन में यह पहला मौका है, जब राजधानी की हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंची है। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार दोपहर AQI 179 था। इस तरह महज एक दिन में प्रदूषण का स्तर 59 अंक बढ़ गया।

दिल्ली के 59 में से 56 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, जहांगीरपुरी और पूसा में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। यहां AQI क्रमशः 308 और 314 दर्ज किया गया। वहीं, आनंद विहार समेत 16 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में रही।


GRAP की पाबंदियां क्यों लगाई जाती हैं?

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर सिर्फ हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों पर नजर नहीं रखी जाती, बल्कि इसे काबू करने के लिए कई तरह के कदम भी उठाए जाते हैं। इसी मकसद से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू किया जाता है। इसके तहत प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ पाबंदियां भी सख्त होती जाती हैं।

GRAP को प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर चार चरणों में बांटा गया है। AQI 201 से 300 के बीच होने पर स्टेज-1 (खराब), 301 से 400 के बीच स्टेज-2 (बेहद खराब), 401 से 450 के बीच स्टेज-3 (गंभीर) और 450 से ऊपर होने पर स्टेज-4 (गंभीर प्लस) लागू किया जाता है।

GRAP के स्टेज-1 के तहत, प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए जाते हैं। इनमें धूल को रोकने के लिए नियमित रूप से सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल का बेहतर प्रबंधन, और कचरे का उचित निपटान शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, और उद्योगों, बिजली संयंत्रों तथा ईंट भट्ठों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के कदम भी उठाए जाते हैं।

मौसम में बदलाव भी बढ़ा रहा प्रदूषण

दिल्ली की हवा खराब होने के पीछे मौसम में हो रहे बदलाव भी एक वजह हैं। तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार में उतार-चढ़ाव के कारण प्रदूषक कण वातावरण में आसानी से फैल नहीं पाते। ऐसे में ये हवा में जमा होने लगते हैं और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है।

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